प्रयागराज (राजेश सिंह)। मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 19 जनवरी, 2026 को जारी किया गया, जिसमें उन पर माघ मेला 2025-26 में अपने शिविर के बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित करने का आरोप है। प्राधिकरण के अनुसार, यह कृत्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना है।
प्राधिकरण ने अपने पत्र में बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में सिविल अपील संख्या 3011/2020 विचाराधीन है। इस अपील के अंतर्गत आई.ए. नंबर 153943/2022 में आवेदक की प्रार्थना पर 14 अक्टूबर, 2022 को न्यायालय ने आदेश दिया था। इस आदेश में स्पष्ट किया गया था कि जब तक यह अपील निस्तारित नहीं हो जाती या पट्टाभिषेक के संबंध में कोई अग्रिम आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।
प्राधिकरण ने कहा कि वर्तमान स्थिति में कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है। इसके बावजूद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा माघ मेला प्रयागराज 2025-26 में अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य प्रदर्शित किया गया है। इस कार्य को उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन माना गया है।
नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अपेक्षा की गई है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करें। साथ ही, उन्हें पत्र की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि वे अपने नाम के साथ शंकराचार्य शब्द का प्रयोग या स्वयं को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं। प्राधिकरण ने शिविर में लगाए गए बोर्ड के फोटोग्राफ्स भी संलग्न किए हैं।

