नई दिल्ली। भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों वाले मामले में अदालत ने शिकायतकर्ता पूनम पांडे को बड़ा झटका दिया है। राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त चीफ न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने उनकी पुरानी शिकायत को दोबारा चलाने की मांग खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि जिस मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को पहले ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सही ठहरा चुके हैं। ऐसे में उसी मामले को फिर से शिकायत के तौर पर शुरू नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा दायर आवेदन कानूनन बनाए रखने योग्य नहीं है और यह न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने यह भी कहा कि सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत जब शिकायत पुलिस को जांच के लिए भेज दी जाती है, तो मजिस्ट्रेट के सामने अलग से कोई शिकायत लंबित नहीं रहती। इसलिए शिकायत को फिर से शुरू करने का सवाल ही नहीं उठता।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एक ही आरोप और तथ्यों पर दोबारा शिकायत तभी चल सकती है, जब पहले के आदेश में गंभीर कानूनी गलती हो या नए तथ्य सामने आए हों, जो इस मामले में नहीं है।
यह मामला 2018 का है। कोर्ट के आदेश पर 2023 में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, लेकिन जांच के बाद पुलिस ने केस बंद करने की रिपोर्ट दे दी। इसके खिलाफ पूनम पांडे ने विरोध याचिका दायर की थी, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने पहले संज्ञान लेते हुए आरोपित को तलब किया था लेकिन पुनरीक्षण कोर्ट ने यह आदेश रद कर इसे कानून का गलत इस्तेमाल बताया और पूनम का आवेदन भी खारिज कर दिया।
