मेनू की मुख्य विशेषताएं: परंपरा और आधुनिकता का मिलन
रात्रिभोज में परोसने वाले कुछ प्रमुख व्यंजन दिए गए हैं...
स्टार्टर
राजमा गिलावत: कश्मीरी राजमा से तैयार किया गया यह कबाब अपनी मखमली बनावट के लिए जाना जाता है, जो मेहमानों को उत्तर भारत के स्वादों से परिचित कराएगा।
मेन कोर्स
मेनू में भारत की विविध शीतकालीन फसलों को शामिल किया गया है, जो पोषण और कायाकल्प पर केंद्रित हैं। इसमें बाजरा और अन्य मोटे अनाजों (मिलेट्स) से बने नवाचारी व्यंजन शामिल हैं।
जीआई-टैग प्राप्त मुनस्यारी राजमा गिलावत: उत्तराखंड का मुनस्यारी अपने खास तरह के राजमा के लिए जाना जाता है, जो अपने हल्के अखरोट जैसे स्वाद और मुलायम, मलाईदार बनावट के लिए पसंद किया जाता है। यह कुमाऊं क्षेत्र में स्थानीय लोगों का पसंदीदा है और इसके प्राकृतिक रूप से सुखदायक स्वाद के लिए इसका आनंद लिया जाता है।
मिठाई (डेजर्ट)
रस मलाई ट्रेस लेचेस: यह व्यंजन इस शाम का मुख्य आकर्षण है। पारंपरिक भारतीय 'रस मलाई' और लैटिन अमेरिकी 'ट्रेस लेचेस' केक का यह फ्यूजन, वैश्विक एकता और नवाचार का प्रतीक है।
पेय
कश्मीरी कहवा
फिल्टर कॉफी
दार्जिलिंग चाय
भोजन के समापन के अवसर पर मेहमानों को भारतीय गुलाब और मिश्री गुलकंद चॉकलेट लीफ ( पान ) भी परोसा जाएगा । आईटीसी के शेफों ने इस मेनू को विशेष रूप से शिखर सम्मेलन के 'भविष्योन्मुखी' दृष्टिकोण के साथ तालमेल बिठाने के लिए डिजाइन किया है। जहाँ एआई शिखर सम्मेलन तकनीकी नवाचार की बात करता है, वहीं यह रात्रिभोज भारत की खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि की शक्ति को प्रदर्शित करता है।
