इस साल लगातार तीसरी बार ऐसा हो रहा है जब रंगों का त्योहार होली और मुकद्दस रमजान का महीना एक ही समयावधि में पड़ रहे हैं। इसके बाद यह संयोग अब सीधे 31 साल बाद, यानी वर्ष 2057 में दोबारा बनेगा। इस वर्ष होली ऐसे समय में मनाई जाएगी जब मुस्लिम समाज रोजा रखकर इबादत में मशगूल रहेगा...
प्रयागराज (राजेश सिंह)। वर्ष 2026 में एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक सौहार्द का खास नजारा देखने को मिलेगा। इस साल लगातार तीसरी बार ऐसा हो रहा है जब रंगों का त्योहार होली और मुकद्दस रमजान का महीना एक ही समयावधि में पड़ रहे हैं। इसके बाद यह संयोग अब सीधे 31 साल बाद, यानी वर्ष 2057 में दोबारा बनेगा। इस वर्ष होली ऐसे समय में मनाई जाएगी जब मुस्लिम समाज रोजा रखकर इबादत में मशगूल रहेगा। इससे पहले भी पिछले दो वर्षों में यही स्थिति बनी थी, लेकिन 2026 के बाद यह अवसर लंबे समय तक नहीं आएगा।
इस्लामिक कैलेंडर से जुड़ा है पूरा गणित
विशेषज्ञों के अनुसार, इस्लामिक (हिजरी) कैलेंडर पूरी तरह चंद्र गणना पर आधारित होता है। इसमें वर्ष की कुल अवधि लगभग 354 दिन की होती है, जो सौर कैलेंडर से करीब 10-12 दिन छोटी होती है। इसी कारण रमजान हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर में पहले खिसकता चला जाता है। करीब 33 वर्षों में इस्लामिक कैलेंडर एक पूरा मौसमी चक्र पूरा करता है, जिसमें सर्दी, गर्मी और बरसात तीनों मौसम शामिल होते हैं। इसी चक्र के चलते होली जैसे सौर पर्व कभी-कभी रमजान के साथ पड़ जाते हैं।
सर्दी में रमजान का आगाज भी खास
इस वर्ष रमजान की शुरुआत फरवरी के मध्य में होने की संभावना है। लगभग 22 साल बाद ऐसा मौका आया है जब रमजान का आरंभ ठंड के मौसम में होगा। यह स्थिति अगले करीब 11 वर्षों तक बनी रहेगी, जिसके बाद रमजान फिर गर्मी और बारिश के महीनों में पहुंच जाएगा। वर्ष 2057 और 2058 में लगातार दो वर्षों तक होली रमजान के दौरान मनाई जाएगी। अनुमान है कि 2057 में रमजान मार्च-अप्रैल के बीच रहेगा, जबकि 2058 में यह फरवरी से मार्च के बीच पड़ सकता है। इन दोनों वर्षों में होली क्रमश: मार्च और फरवरी के अंतिम दिनों में होगी। यह दुर्लभ संयोग देश की सांस्कृतिक विविधता और आपसी सहिष्णुता का प्रतीक माना जाता है। जहां एक ओर मुस्लिम समाज इबादत और संयम के महीने में होता है, वहीं दूसरी ओर हिंदू समाज रंगों और उल्लास के साथ होली मनाता है दोनों परंपराएं साथ-साथ चलती नजर आती हैं।