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शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है महाशिवरात्रि

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प्रयागराज। हजारों वर्षों से विज्ञान 'शिव' के अस्तित्व को समझने का प्रयास कर रहा है । जब भौतिकता का मोह खत्म हो जाए और ऐसी स्थिति आए कि ज्ञानेंद्रियां भी बेकाम हो जाएं, उस स्थिति में शून्य आकार लेता है, और जब शून्य भी अस्तित्वहीन हो जाए तो वहां शिव का प्राकट्य होता है । शिव यानी शून्य से परे, जब कोई व्यक्ति भौतिक जीवन को त्याग कर सच्चे मन से मनन करे तो शिव की प्राप्ति होती है। उन्हीं एकाकार और अलौकिक शिव के महारूप को उल्लास से मनाने का त्योहार है महाशिवरात्रि।

मध्यरात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक धार्मिक त्योहार है, महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत-उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं | महाशिवरात्रि को लेकर भगवान शिव से जुड़ी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं| ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रह्मा के रूद्र रूप में मध्यरात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था।

शिवरात्रि इस बार दो शुभ योग :

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि इस बार दो शुभ योगों में 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी में मनाई जाएगी।

'भोलेनाथ पृथ्वी पर सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं'

महाशिवरात्रि के दिन शिवजी के भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हैं और विधि-विधान से शिव-गौरी की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं, इसलिए महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। दरअसल महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं, अत: महाशिवरात्रि पर रात्री जागरण करना एक श्रेष्ठ उपाय है ।

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर पूजा का समय :

सायं 06:15 बजे से रात्रि 09:28 बजे तक

द्वितीय प्रहर पूजा का समय :

रात्रि 09:29 बजे से मध्यरात्रि 12:41 बजे तक

तृतीय प्रहर पूजा का समय :

मध्यरात्रि 12:42 बजे से 16 फरवरी प्रातः03:54 बजे तक

चतुर्थ प्रहर पूजा का समय :

16 फरवरी, प्रातः 03:55 बजे से प्रातः 07:07 बजे तक

राशि के अनुसार पूजन विधि 

मेष : बेलपत्र अर्पित करें ।

वृष : दूध मिश्रित जल चढ़ाएं ।

मिथुन : दही मिश्रित जल चढ़ाएं ।

कर्क : चंदन का इत्र अर्पित करें ।

सिंह : घी का दीपक जलाएं ।

कन्या : काला तिल और जल मिलाकर अभिषेक करें ।

तुला: जल में सफेद चंदन मिलाएं ।

वृश्चिक : जल और बेलपत्र चढ़ाए ।

धनु : अबीर या गुलाल चढ़ाएं ।

मकर : भांग और धतूरा चढ़ाएं ।

कुंभ : पुष्प चढ़ाएं ।

मीन : गन्ने के रस और केसर से अभिषेक करें ।

शिव पूजा का महत्व

भगवान शिव की पूजा करते समय बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए । ऐसा करने से व्यक्ति की सभी समस्याएं दूर होकर उसकी इच्छाएं पूरी होती हैं।


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