प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फिर दोहराया है कि परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाले जोड़ों की जान और स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने इस संबंध में वर्ष 2019 के शासनादेश का पालन करने का निर्देश दिया है, जिसमें ऐसे जोड़ों के लिए जरूरी बचाव और सुधार के उपाय हैं।
सामिया व अन्य की याचिका निस्तारित
सामिया व अन्य की याचिका निस्तारित करते हुए न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने कहा है कि पुलिस अधिकारी हर मामले में खतरे का अंदाजा लगाने और स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षित रहने की जगह और जरूरी सुरक्षा देने के लिए जिम्मेदार हैं।
हाई कोर्ट का दरवाजा बालिग जोड़े ने खटखटाया था
बालिग जोड़े ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और महिला के पिता द्वारा पैदा की गई "गैर-कानूनी रुकावट" से जान और आजादी की रक्षा के लिए निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने कहा कि पिछले साल नवंबर में हाई कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा के बाद महिला के पिता से याचीगण की जान को अब कोई खतरा नहीं है।
निर्देशों के मुताबिक कार्यवाही की जाए
कोर्ट ने कहा कि अगर याचीगण की जान और आजादी को कोई असली और गंभीर खतरा महसूस होता है तो वे पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। अधिकारियों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे खतरे का अंदाजा लगाकर समुचित सुरक्षा दें। इसके लिए वर्ष 2019 के शासनादेश और शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक कार्यवाही की जाए।
ऐसे मामलों को सुलझाने को गाइडलाइन बनाने का निर्देश
कोर्ट का कहना था, ‘बड़ी संख्या में युवा जोड़े जान और आजादी की सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं।’ कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को असरदार सिस्टम बनाने और जिला स्तर पर ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया है।
राज्य सरकार ने बताए हैं उपाय
राज्य सरकार ने 31 अगस्त 2019 को शासनादेश जारी कर शादी या किसी भी सहमति से बने रिश्ते से पैदा होने वाले खतरों का सामना कर रहे जोड़ों की सुरक्षा के लिए जरूरी रोकथाम, सुधार और सजा के उपाय बताए हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि खाप पंचायतों या इज्जत से जुड़ी धमकियों को गंभीर मामला माना जाएगा।
निर्देशों का पालन न करने वालों के खिलाफ सजा दी जाए
हाई कोर्ट ने कहा है कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही कर सजा दी जाए। शासनादेश 2019 में दिए गए निर्देश का सख्ती से पालन करना संबंधित अधिकारियों के लिए जरूरी है।
