प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज की पावन धरती पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ष्चलो मन गंगादृयमुना तीरष् कार्यक्रम के दूसरे दिन शनिवार को सांस्कृतिक छटा बिखरी। इस आयोजन में अध्यात्म, भक्ति और कला का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ पारंपरिक लोकगायन जवाबी बिरहा से हुआ। त्रिभुवन गोंड, अजय कुमार तिवारी, यशोदा नंदन और उनके साथियों ने जब बिरहा की तान छेड़ी, तो उपस्थित जनसमूह झूम उठा। बिरहा की तीखी नोक-झोंक और लोक गीतों ने कार्यक्रम में ऊर्जा भर दी।
इसके बाद प्रसिद्ध भजन गायक सिद्धार्थ मिश्रा ने अपनी सुमधुर आवाज से समां बांध दिया। उनके द्वारा गाए गए भजन “गोविंद दामोदर माधवेति” और “गोपाल में मेरा मन मोहिया सांवरे” ने श्रोताओं को आत्मिक शांति का अनुभव कराया। नीलम सिंह एवं उनके दल ने प्रयागराज की महिमा का बखान करते हुए “प्रयागराज माघ मेलवा घुमाई दे” और “गंगा जमुना सरस्वती त्रिवेणी बड़ा निक लागे” जैसे गीतों की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संगम सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा प्रस्तुत रामलीला रही। सुबोध सिंह के निर्देशन में कलाकारों ने सीता स्वयंवर प्रसंग का जीवंत मंचन किया। विक्रांत केसरवानी (श्रीराम), अर्पिता अग्रवाल (सीता), अमित श्रीवास्तव (लक्ष्मण) और अनूप श्रीवास्तव (परशुराम) के अभिनय ने दर्शकों को बांधे रखा। इसके अतिरिक्त, शुभम कुमार के दल ने कृष्ण-लीला पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की, जिसने संध्या को और भी आकर्षक बना दिया।
कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों ने कलाकारों को अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक सराहनीय संदेश दिया गया।
