वाराणसी (स्वाति गुप्ता)। महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस दिन बाबा की नगरी बम-बम के उद्घोष से गूंज उठी। दोपहर बाद निकली बरातों ने शहर की सड़कों को श्रद्धालुओं से भर दिया, जिससे हर घर में बाबा का घर नजर आया। इस बारात में 10 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने बाबा भोलेनाथ के प्रति अपनी भक्ति का प्रदर्शन किया।
श्रद्धालुओं की भीड़ में विदेशी पर्यटक भी शामिल थे, जो हर-हर महादेव के उद्घोष में आनंदित नजर आए। इस बारात में महादेव का स्वरूप घोड़े पर सजे हुए श्रद्धालुओं ने प्रस्तुत किया। महिलाओं ने परछा के माध्यम से महादेव की आराधना की। इस बारात में शामिल कलाकारों ने मां काली का स्वरूप धारण किया, जिसमें नरमुंडों की माला पहने हुए कलाकारों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
छोटे-छोटे कलाकारों ने विभिन्न प्रकार के स्वरूप धारण कर इस यात्रा में भाग लिया। इस बरात में 200 छोटी-बड़ी झांकियां शामिल थीं, जिनमें शिव स्वरूप के बाल कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति दी। यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि का भी परिचायक था।
महाशिवरात्रि के इस पर्व पर काशी में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। हर गली, हर चौराहा और हर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ के प्रति अपनी भक्ति को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान किए। इस अवसर पर काशी के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने भाग लिया।
बाबा की नगरी में इस दिन का महत्व अत्यधिक है। महाशिवरात्रि के दिन भक्तजन उपवास रखते हैं और रात्रि जागरण करते हैं। इस दिन विशेष रूप से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। काशी में इस दिन का आयोजन भव्यता और श्रद्धा के साथ किया जाता है, जो इसे अन्य दिनों से अलग बनाता है।
इस अवसर पर काशी के विभिन्न मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। भक्तों ने मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की और बाबा भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दिन का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है, क्योंकि यह लोगों को एकजुट करता है और सामूहिक रूप से भक्ति का अनुभव कराता है।
महाशिवरात्रि के इस पर्व पर काशी की गलियों में बम बम भोले के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को महादेव की कृपा का आशीर्वाद दिया। इस दिन का आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित करता है। इस दिन की भव्यता और श्रद्धा ने काशी को एक बार फिर से महादेव की नगरी के रूप में स्थापित किया।
