रेप के बाद गला दबाया था गोरखपुर की अदालत ने सुनाई है उम्रकैद
प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के बाद तीन साल की बेटी की गला दबाकर हत्या करने के मामले में अभियुक्त गोरखपुर निवासी उमेश कुमार की तीसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने हाल ही में इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए कहा, हमें खेद है, हम सहमत नहीं हो सकते। हमने मूल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का परिशीलन किया है, जिसमें गर्दन पर गोलाकार लिगेचर (बंधन) का निशान है। कोर्ट ने कहा, हमारी समझ के अनुसार यह प्रथम दृष्टया पीड़ित जो तीन वर्षीय असहाय बच्ची थी, का गला घोंटने के लिए बंधन के प्रयोग का स्पष्ट मामला है।
कोई आधार नहीं कि तीसरी बार जमानत देने को मजबूर हों
अपीलार्थी की प्रथम और द्वितीय जमानत अर्जियां क्रमशः 18 नवंबर 2022 और पांच जुलाई 2023 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थीं। कोर्ट के अनुसार, अपीलार्थी के अधिवक्ता का तर्क है कि डाक्टर ने मौत का कारण एस्फिक्सिया और मॉर्टेम इंजरी बताया है जबकि ऑटोप्सी रिपोर्ट में एंटीमॉर्टेम इंजरी का कोई उल्लेख नहीं है। हमने मूल रिकॉर्ड की जांच की है और पाते हैं कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण "एस्फिक्सिया और एंटी-मॉर्टेम इंजरी" है। इसलिए अधिवक्ता का दूसरा तर्क तथ्यात्मक रूप से गलत है।
कोई नया आधार नहीं है जो हमें तीसरी बार जमानत देने के लिए मजबूर करे। कोर्ट ने अभियुक्त की क्रिमिनल अपील को 23 मार्च 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। अभियुक्त को छह अक्टूबर 2021 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पीसी अधिनियम) ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
इस आदेश को हाईकोर्ट में आपराधिक अपील में चुनौती दी गई है। अभियुक्त के खिलाफ वर्ष 2017 में आइपीसी की धारा 302/201 के तहत कैंपियरगंज थाने में केस दर्ज किया गया था। पूर्व में कोर्ट ने कहा था कि ऐसी परिस्थितियों में केवल इसलिए कि अभियोजन पक्ष के गवाह जो परिवार के सदस्य हैं, बाद में मुकर गए अपीलकर्ता को जमानत का हकदार नहीं बनाएगा।
तीन वर्षीय नाबालिग बेटी का गला घोंटना एक बहुत ही गंभीर अपराध है, जिस पर नरमी नहीं बरती जा सकती। कोर्ट ने पेपर बुक तैयार करने तथा अपील को सुनवाई हेतु लिस्ट करने का आदेश दिया है।अपील की सुनवाई 23मार्च को होगी।
