Ads Area

Aaradhya beauty parlour Publish Your Ad Here Shambhavi Mobile Aaradhya beauty parlour

चीन की वैश्विक साख पर संकट, पाकिस्तान से ईरान तक क्यों फेल हो रही चीनी तकनीक?

sv news


 नई दिल्ली। चीन की उभरती सैन्य प्रौद्योगिकी की छवि पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि उसके निर्यातित वायु रक्षा सिस्टम्स—खासकर HQ-9B (रेड फ्लैग-9B)—पाकिस्तान, वेनेजुएला और अब ईरान में लगातार विफल साबित हुए हैं।

ये घटनाएं बीजिंग के दावों को झुठला रही हैं कि उसकी ये प्रणालियां अमेरिकी पैट्रियट या रूसी S-300/S-400 जैसी उन्नत और विश्वसनीय हैं। वैश्विक रक्षा विश्लेषकों और मीडिया में अब चीन को "ग्लोबल स्टेज पर हंसी का पात्र" कहकर चित्रित किया जा रहा है, क्योंकि उसके हथियार वास्तविक युद्ध में बार-बार फेल हो रहे हैं।

पाकिस्तान: ऑपरेशन सिंदूर में शुरुआती झटका (मई 2025)

मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों के संक्षिप्त संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) में पाकिस्तान ने चीन से खरीदे HQ-9P (HQ-9 का पाकिस्तानी संस्करण) और LY-80/HQ-16 सिस्टम्स को सक्रिय किया था। लेकिन भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों, हरॉप ड्रोन्स और अन्य सटीक हथियारों ने इन सिस्टम्स को बेअसर कर दिया।

YLC-8E "एंटी-स्टेल्थ" रडार और HQ-9 बैटरियां नष्ट हुईं। कोई भी महत्वपूर्ण इंटरसेप्शन नहीं हुआ। भारतीय रिटायर्ड मेजर जनरल ने कहा, "HQ-9 और HQ-16 ने खराब प्रदर्शन किया; हमने उन्हें सफलतापूर्वक न्यूट्रलाइज कर दिया।" यह पहला बड़ा उदाहरण था जहां चीन के प्रचारित "उन्नत" सिस्टम असफल रहे।

वेनेजुएला: अमेरिकी ऑपरेशन में रडार और मिसाइल फेल (जनवरी 2026)

जनवरी 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर सर्जिकल एयर असॉल्ट चलाया, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को कैप्चर किया गया। वेनेजुएला के पास चीनी JY-27A "एंटी-स्टेल्थ" रडार और HQ-9/HQ-12 जैसी सिस्टम्स थीं, साथ ही रूसी S-300।

150 से ज्यादा अमेरिकी विमानों (F-35, F-22, EA-18G ग्राउलर्स) ने वेनेजुएला के एयरस्पेस में घुसपैठ की, लेकिन JY-27A ने एक भी विमान डिटेक्ट नहीं किया। कोई मिसाइल लॉन्च नहीं हुई; इलेक्ट्रॉनिक जामिंग और साइबर अटैक से सिस्टम पैरालाइज हो गए। विश्लेषकों ने इसे "चीनी रडार की राष्ट्रीय शर्मिंदगी" कहा। यह चीन के निर्यात हथियारों की दूसरी बड़ी फेलियर थी।

ईरान: HQ-9B की तीसरी और सबसे बड़ी विफलता (फरवरी-मार्च 2026)

फरवरी 28, 2026 को अमेरिका-इजराइल ने संयुक्त स्ट्राइक्स ("ऑपरेशन एपिक रैथ" या समान) चलाए, जिसमें ईरान के 20+ प्रांतों में न्यूक्लियर साइट्स, IRGC बेस और यहां तक कि सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सहित वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। ईरान ने 2025 में चीन से HQ-9B खरीदा था (तेल के बदले हथियार डील), जो नतांज, फोर्डो जैसी साइट्स की सुरक्षा के लिए तैनात था। HQ-9B ने कोई इंटरसेप्शन नहीं किया; F-35 स्टेल्थ फाइटर्स, टॉमहॉक और LRASM मिसाइलों ने आसानी से घुसपैठ की। रडार जाम हुए, सिस्टम इंटीग्रेशन फेल रहा। ईरान ने चीन से असंतोष जताया; कई HQ-9B यूनिट्स पहले घंटे में ही नष्ट हो गईं। यह तीसरी फेलियर थी, जिसने चीन की HQ-9B को "पेपर टाइगर" साबित किया।

क्यों हो रही हैं ये विफलताएं?

मुख्य कारणस्टेल्थ और ईडब्ल्यू श्रेष्ठता: F-35/F-22 जैसे स्टेल्थ प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (जैमिंग) से रडार ब्लाइंड हो जाते हैं। सिस्टम इंटीग्रेशन की कमी: चीनी सिस्टम्स अक्सर अलग-अलग कंपोनेंट्स पर आधारित होते हैं, जो रीयल-टाइम में एकीकृत नहीं हो पाते। ट्रेनिंग और ऑपरेशनल इश्यू: यूजर देशों (पाकिस्तान, वेनेजुएला, ईरान) में ट्रेनिंग और मेंटेनेंस कमजोर। ओवर-हाइप vs रीयल परफॉर्मेंस: चीन पैरेड और एक्सपो में दावे करता है, लेकिन रीयल कॉम्बैट में ये साबित नहीं होते।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Top Post Ad