प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज जंक्शन पर आरपीएफ ने एक फर्जी दरोगा को पकड़ा है। वह 3 महीने से स्टेशन पर घूम रहा था। ट्रेन में बिना टिकट चलने वालों को डरा धमकाकर वसूली करता था। उसने बताया- परिवार वाले लगातार नौकरी का दबाव बना रहे थे। तब उसने परिवार वालों से झूठ कहा कि वह रेलवे में दरोगा हो गया।
तब से वह फर्जी दरोगा बनकर प्रयागराज जंक्शन पर घूम रहा था। रविवार को भी वह स्टेशन पर था। आरपीएफ की टीम ने गश्त के दौरान उसे पकड़ा। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल लिया है। वह आरपीएफ की वर्दी में था।
रविवार को जीआरपी प्रभारी अकलेश कुमार सिंह की टीम प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर गश्त कर रही थी। तभी एक दरोगा संदिग्ध अवस्था में दिखा। उन्होंने उससे पूछताछ की तो वह डर गया और सच कबूल दिया। उसने बताया- मेरा नाम दिव्यांशु कुमार है। मैं गाजीपुर के थाना बरेसर के गांव रेंगा का रहने वाला हूं। मैं भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। मेरे घरवालों का मुझ पर जॉब का दबाव था। एक दिन मैंने घरवालों से कह दिया कि मेरी जॉब लग गई। मैं रेलवे पुलिस में दरोगा हो गया हूं। इसके बाद मैं बाजार गया। जहां से मैंने स्टार, बैच, मोनोग्राम, नीली डोरी और लाल जूते खरीदे।
3 महीने से स्टेशन पर घूम रहा था, कर रहा था चेकिंग
दिव्यांशु कुमार ने बताया- मैं तीन महीने से जंक्शन पर घूम रहा हूं। मैं चेकिंग करता था। बिना टिकट मुफ्त यात्रा करने वालों को डराता धमकाता था। माघ मेले में मैं अपनी पत्नी, पिता और मां को प्रयागराज लाया था।
वर्दी का रौब दिखाकर परिवार को संगम में 'सरकारी रसूख' के साथ स्नान कराया। जिसके बाद मेरे घर वाले पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि मैं वास्तव में रेलवे पुलिस का अधिकारी हूं। क्षेत्राधिकारी रेलवे अरुण कुमार पाठक ने बताया कि दिव्यांशु के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। उसके पास से पूर्ण आरपीएफ वर्दी मिली। इसके अलावा 650 रुपए नकद, आधार कार्ड और एटीएम कार्ड भी मिले हैं।
