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राजा महेंद्र प्रताप यदि राष्ट्रपति होते तो उस समय प्रधानमंत्री कौन होते? अभ्यर्थी से पूछे दिलचस्प प्रश्न

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। पीसीएस के साक्षात्कार में अभ्यर्थियों से इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और प्रशासनिक स्थितियों से जुड़े विविध प्रश्न पूछे जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में चल रहे साक्षात्कार में एक अभ्यर्थी से बिना नाम बताए अपना परिचय देने को कहा गया।

राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर करने का जवाब देने पर बोर्ड ने पूछा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह कौन थे और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका क्या योगदान रहा। इसके बाद एक रोचक प्रश्न पूछा गया कि यदि राजा महेंद्र प्रताप भारत के राष्ट्रपति होते तो उस समय प्रधानमंत्री कौन होते। अभ्यर्थी ने बरकतुल्लाह का नाम लिया, जबकि बोर्ड के एक सदस्य ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उल्लेख भी किया।

एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि आधुनिक इतिहास में किसको आप चाणक्य बोलोगे। एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि ईरान अमेरिका युद्ध का मुख्य कारण क्या है। इतिहास से जुड़े प्रश्नों में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक आंदोलन कहे जाने पर प्रश्न पूछा गया। साथ ही पूछा गया कि बंगाल को स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र क्यों माना जाता है और इसके अलावा अन्य कौन-कौन से क्षेत्र आंदोलन के प्रमुख केंद्र रहे।

इतिहास के अन्य प्रश्नों में 1857 के विद्रोह को लेकर भी चर्चा हुई। बोर्ड ने पूछा कि ब्रिटिश इतिहासकार इसे ‘म्यूटिनी’ कहते हैं जबकि भारतीय इतिहासकार ‘राष्ट्रीय विद्रोह’ मानते हैं, इस पर राय बताइए। अंतरराष्ट्रीय राजनीति और समसामयिक घटनाओं से जुड़े प्रश्नों में रासायनिक हथियारों के उपयोग के उदाहरण पूछे गए। अभ्यर्थी से पूर्व और पश्चिम एशिया में रासायनिक हथियारों के प्रयोग, विशेष रूप से सद्दाम हुसैन से जुड़े घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली गई।

इसके साथ ही वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के मुख्य कारणों पर भी प्रश्न किया गया। प्राचीन इतिहास से जुड़े सवाल में पूछा गया कि वह कौन सा शासक था जिसकी सेना अत्यंत विशाल मानी जाती थी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित खंड में क्वांटम फिजिक्स से जुड़े कई प्रश्न पूछे गए। इसके अतिरिक्त वैश्विक स्तर पर भारत के विज्ञान एवं अनुसंधान क्षेत्र में तुलनात्मक स्थान, अनुसंधान एवं विकास पर भारत के खर्च और विश्व के अन्य देशों की तुलना में उसकी स्थिति के बारे में भी जानकारी ली गई।

एक अभ्यर्थी से एक प्रशासनिक परिस्थिति पर आधारित प्रश्न पूछा गया कि यदि किसी गांव में मिड-डे मील योजना के तहत दलित महिला द्वारा भोजन बनाए जाने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर रहे हों और समझाने के बावजूद न मान रहे हों, तो एसडीएम के रूप में वह इस स्थिति से कैसे निपटेंगे।


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