अंतिम पग' भरते ही छलकी माता-पिता की आंखें, कुलदीप को 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर'
प्रयागराज (राजेश सिंह)। बिहार के गया स्थित अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (OTA) के मैदान पर आज शौर्य और जज्बे का अद्भुत संगम देखने को मिला। अकादमी की 28वीं पासिंग आउट परेड में 281 युवा कैडेट्स ने 'अंतिम पग' पार कर भारतीय सेना में बतौर अधिकारी कदम रखा। इस गौरवशाली क्षण के गवाह बने इन जांबाजों के माता-पिता, जिनकी आंखों में अपने लाडलों के कंधों पर चमकते सितारे देख गर्व के आंसू छलक आए।
इस पासिंग आउट परेड की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शॉर्ट सर्विस कमीशन (तकनीकी) के कुल 281 कैडेट्स पास आउट हुए। इनमें 253 पुरुष और 28 महिला अधिकारी शामिल हैं। कठिन प्रशिक्षण के बाद ये सभी अब सेना की तकनीकी शाखाओं में अपनी सेवाएं देंगे। परेड के दौरान कैडेट्स के सधे हुए कदमों और बुलंद हौसलों ने वहां मौजूद हर शख्स को जोश से भर दिया।
दक्षिणी कमान के सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने परेड की समीक्षा की। उन्होंने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कुछ प्रेरक बातें कहीं की बदलते युद्ध क्षेत्र के अनुसार खुद को ढालें। उन्होंने कहा पद से नहीं, बल्कि अपने चरित्र और निस्वार्थ सेवा से सैनिकों का दिल जीतें। देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा को ही अपना जीवन ध्येय बनाएं।
परेड के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मेधावी कैडेट्स को नवाजा गया उनमें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर: एकेडमी अंडर ऑफिसर कुलदीप (सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर)।
स्वर्ण पदक बटालियन अंडर ऑफिसर अस्विन किरुपाई को मिला।(मेरिट में प्रथम)। रजत पदक एकेडमी अंडर ऑफिसर कुलदीप (मेरिट में द्वितीय) और कांस्य पदक बटालियन कैडेट एडजुटेंट चरण जी वी (मेरिट में तृतीय)। इसके साथ चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर: 'गुरेज़ कंपनी' को ओवरऑल चैंपियन चुना गया।
परेड के बाद सबसे भावुक पल 'पिपिंग सेरेमनी' रही। माता-पिता और परिजनों ने अपने हाथों से कैडेट्स के कंधों पर रैंक लगाई। इसके साथ ही इन युवाओं ने देश की रक्षा की पवित्र शपथ ली। गया OTA का "शौर्य, ज्ञान, संकल्प" का आदर्श वाक्य आज इन नए अधिकारियों के चेहरों पर साफ झलक रहा था।
