पीटीआई, नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने भारत और ईरान के बीच गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए दोनों देशों की मित्रता को पांच हजार साल पुरानी बताया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान, भारत के साथ किसी भी तरह का संघर्ष या तनाव नहीं चाहता है, बल्कि सहयोग के नए आयाम स्थापित करने का इच्छुक है।
दोनों देशों के बीच अटूट सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भारत से प्रेम करते थे और भारत-ईरान के बीच अच्छे सहयोग एवं मधुर संबंध पर जोर देते थे। भारत के प्रति अयातुल्ला खामेनेई का विशेष लगाव एक विशेष साक्षात्कार में हकीम इलाही ने अयातुल्ला अली खामेनेई के भारत प्रेम का जिक्र करते हुए एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया।
उन्होंने बताया कि खामेनेई द्वारा लिखी गई पहली पुस्तक भारत के विषय पर ही थी, जो दो खंडों में प्रकाशित हुई थी। यह भारत के प्रति उनके गहरे सम्मान और लगाव को दर्शाता है।
इलाही के अनुसार, खामेनेई अक्सर भारत के साथ बेहतर सहयोग और तालमेल पर जोर देते थे। यही नहीं, उनके उत्तराधिकारी और पुत्र अयातुल्ला मोज्तबा खामेनेई भी भारतीयों की प्रशंसा करते रहे हैं।
इलाही ने बताया कि ईरान में मुलाकातों के दौरान उन्हें अक्सर यह सुनने को मिला कि भारतीय लोग बहुत ईमानदार, दयालु, बुद्धिमान और वफादार होते हैं। ईरान का नेतृत्व भारत को केवल एक पड़ोसी नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक साझेदार के रूप में देखता है।
'होर्मुज' से भारतीय जहाजों को सुरक्षा का आश्वासन पश्चिम एशिया में जारी बढ़ते तनाव के बीच, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारत की चिंताएं स्वाभाविक हैं।
इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए इलाही ने कहा कि भारतीय जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की पूरी अनुमति होगी। उन्होंने पुष्टि की कि ईरानी दूतावास भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। भारत और ईरान के नेतृत्व के बीच हालिया बातचीत को उन्होंने 'सफल' करार दिया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच द्विपक्षीय और ब्रिक्स संबंधी मुद्दों पर हुई चर्चा पर संतोष व्यक्त करते हुए इलाही ने कहा कि भारत न्याय और ज्ञान की भूमि है।
उन्होंने भारतीयों को 'गांधी का शिष्य' बताते हुए कहा कि यहां के लोग धर्म से ऊपर उठकर न्याय का समर्थन करते हैं। अमेरिका और क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का कड़ा रुख अमेरिकी दावों और क्षेत्रीय संघर्षों पर बात करते हुए इलाही ने कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि तेहरान बातचीत की कोशिश कर रहा है। इलाही ने स्पष्ट किया, ''ईरान फिलहाल किसी बातचीत के पक्ष में नहीं है क्योंकि युद्ध की शुरुआत उन्होंने (अमेरिका) की है। हम पांच साल तक युद्ध जारी रखने के लिए तैयार हैं।''
खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के चारों ओर अमेरिका के 33 से 45 सैन्य ठिकाने हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों से इन ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने देने की अपील की थी।
उन्होंने तर्क दिया कि आत्मरक्षा में इन ठिकानों को नुकसान पहुंचाना जरूरी है ताकि ईरान पर दोबारा हमले न हो सकें। इसके साथ ही, उन्होंने अयातुल्ला मोज्तबा खामेनेई की सादगी की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक अनुभवी, बुद्धिमान और विनम्र नेता बताया।
