नई दिल्ली। ईरान में चल रहे युद्ध के चलते पाकिस्तान अफगानिस्तान में हमले तेज कर सकता है। सऊदी अरब पर मिसाइल दागे जाने के बाद इस्लामाबाद पर इस युद्ध में शामिल होने का भारी दबाव है। दरअसल, यह दबाव 17 सितंबर 2025 को पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते के कारण पैदा हुआ है।
अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर हमले की योजना
खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर हमले की योजना बना रहा है, ताकि ईरान युद्ध में शामिल होने से बचने के लिए बहाने के रूप में इसका इस्तेमाल कर सके।
सऊदी अरब से किए गए सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते में कहा गया है कि किसी भी देश के विरुद्ध कोई भी आक्रमण दोनों देशों के विरुद्ध माना जाएगा। यह शब्दावली नाटो के अनुच्छेद-5 के समान है। पाकिस्तान ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह अफगानिस्तान के साथ खुले युद्ध में है। जब इजरायली और अमेरिकी सेनाओं ने ईरान पर हमला किया, तब पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार रियाद में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआइसी) की बैठक में भाग ले रहे थे। डार ने तीन मार्च को सीनेट में कहा कि पाकिस्तान ने व्यक्तिगत रूप से ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान के रक्षा दायित्वों की याद दिलाई थी। अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने यह अनुमान नहीं लगाया था कि ईरान कई पश्चिम एशियाई देशों पर हमले करेगा। सऊदी अरब पर हुए हमले ने पाकिस्तान को चौंका दिया और इसके परिणामस्वरूप नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया।
