नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने शुक्रवार को स्कूलों में काउंसलरों की नियुक्ति अनिवार्य करने की मांग की, ताकि यौन अपराधों का शिकार हुए बच्चों की मदद की जा सके।
सांसद फौजिया खान द्वारा सात फरवरी, 2025 को पेश किए गए निजी सदस्य विधेयक बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा में भाग लेते हुए सुधा मूर्ति ने ऐसे स्कूलों का पंजीकरण रद करने का भी सुझाव दिया, जिनमें काउंसलर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि बचपन में यौन उत्पीड़न का शिकार हुए बच्चे यह आश्वासन चाहते हैं कि यह आपकी गलती नहीं है और यह आश्वासन घर पर मां, शिक्षक या काउंसलर द्वारा दिया जा सकता है।
विधेयक का समर्थन करने वाली सुधा मूर्ति ने काउंसलर की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि काउंसलर वह व्यक्ति होता है जिस पर बच्चे को पूरा भरोसा होता है, जो इस मुद्दे को सुलझाता है क्योंकि जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो बच्चे के पास एक दोस्त या कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो उसकी बात सुन सके और उसे बता सके कि यह उसकी गलती नहीं है।
उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय विश्लेषण के बाद एक विद्यालय में छात्रों के लिए समानुपातिक संख्या में काउंसलर उपलब्ध कराए जाने चाहिए और यह 2,000 छात्रों के लिए एक जैसा नहीं होना चाहिए।
