समाज में समरसता, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य निभाने का आह्वान
कवि सम्मेलन ने बांधा समां, बड़ी संख्या में स्वयंसेवक व नागरिक रहे उपस्थित
प्रयागराज (राजेश सिंह)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खण्ड शंकरगढ़ द्वारा नारीबारी स्थित एक धर्मशाला में होली मिलन एवं सद्भाव संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रयाग विभाग प्रचारक सुबंधु भाई साहब ने स्वयंसेवकों व क्षेत्रीय नागरिकों के साथ फूलों की होली खेलकर अबीर-गुलाल उड़ाते हुए सभी को रंगोत्सव की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि समाज में समरसता, एकता और सद्भाव के रंगों को जीवन में आत्मसात करने का संदेश देने वाला पर्व है।
विशिष्ट अतिथि बौद्धिक शिक्षण प्रमुख अजय जी ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति समाज को एकत्र कर समरस व सद्भावपूर्ण समाज की स्थापना का मार्ग दिखाती है, जहां ऊंच-नीच और भेदभाव का स्थान नहीं होता। उन्होंने कहा कि संघ समाज में पांच प्रमुख विषयों-सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य पालन, कुटुंब प्रबोधन तथा स्वदेशी भावना-को लेकर जनजागरण का कार्य कर रहा है। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान निर्माण और समाज को एक सूत्र में पिरोने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए स्वदेशी अपनाने और भारतीय परंपराओं को पुनः जीवन में स्थापित करने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि जिला प्रचारक सतीश जी ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज में समरसता और संगठन की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी महेंद्र शुक्ला ने की।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में कर्नल अनुपम मिश्र, अभिषेक द्विवेदी, सुरेश भाई, अक्षय शिवम, उमाकांत और ठाकुर इलाहाबादी ने अपनी कविताओं से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के आयोजक खण्ड संघ चालक सूर्यकांत ने सभी अतिथियों व उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला कार्यवाह ब्रह्म प्रताप, खण्ड प्रचारक श्याम सुंदर, खण्ड कार्यवाह शैलेन्द्र सिंह, जिला मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार चतुर्वेदी, जितेन्द्र बहादुर सिंह, आशीष पाल, अशोक मिश्र, दीपक केसरवानी,बाबा वैद्यनाथ केसरवानी, त्रिवेणी प्रसाद द्विवेदी, सत्यम शुक्ला सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
