प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में प्रतिवादी (शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी) की उस संशोधन अर्जी पर आदेश सुरक्षित रख लिया है जिसमें कहा गया था कि वादी (मंदिर पक्ष) ने ऐसा कोई सुबूत नहीं दिया है जिससे उनकी आस्था प्रमाणित हो।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ में भोजनावकाश के बाद प्रकरण सुना गया। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 15 मई नियत की है। इस दिन आदेश सुनाया जा सकता है।
मंदिर पक्ष की तरफ से दायर वाद संख्या (एक, नौ और 16) में अधिवक्ता हरिशंकर जैन तथा सौरभ तिवारी ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश छह नियम दो के तहत प्रमाण ट्रायल का विषय है। मथुरा में कंस का कारागार था। जिस स्थान पर कृष्ण का जन्म हुआ था, वहां बने मंदिर को औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया था, इसके प्रमाण हैं।
मंदिर पक्ष की तरफ से यह भी कहा गया कि सीपीसी के आदेश सात नियम 11 के तहत वाद तय किया जा चुका है। ऐसे में संशोधन अर्जी पोषणीय नहीं है। इस तरह का तर्क वाद संख्या 13 में वादी और अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने भी रखा।
