प्रयागराज (राजेश सिंह)। विधानसभा चुनाव का अघोषित बिगुल बजने के साथ नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। टिकट के लिए नेता गोट सेट करने में जुटे हैं। सत्ता दल भाजपा में टिकट के दावेदारों की भीड़ अधिक है। भाजपा से निराश नेताओं को बसपा में आशा की किरण नजर आ रही है। इसमें ब्राह्मण नेताओं की संख्या अधिक है।
कई ब्राह्मण नेता भाजपा में रहकर बसपा की टिकट के लिए दौड़ लगा रहे हैं। इसमें बसपा के कई पूर्व नेता भी घर वापसी को आतुर हैं। सत्ता जाने पर बसपा का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले नेता टिकट न मिलता देख पुराने घर में लौटने की जुगत भिड़ा रहे हैं।
12 विधानसभा क्षेत्रों वाले प्रयागराज में भाजपा के छह, उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल एस व निषाद पार्टी के एक-एक तथा सपा के चार विधायक हैं। भाजपा 2017 से प्रदेश की सत्ता पर काबिज है।
इसके बाद सपा और बसपा के तमाम नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसमें ब्राह्मण नेताओं की संख्या अधिक है। उन्हें लगा था कि भाजपा में रहने से उन्हें टिकट मिल जाएगा, लेकिन वैसा होता दिख नहीं रहा।
करछना विधानसभा क्षेत्र के कभी बसपा के विधायक रहे ब्राह्मण नेता भी उसमें शामिल हैं। वह भाजपा के सदस्य हैं, लेकिन टिकट के लिए अपनी पुरानी पार्टी बसपा में दौड़ लगा रहे हैं। भाजपा यमुनापार के पूर्व उपाध्यक्ष सहित तीन ब्राह्मण नेता मेजा विधानसभा क्षेत्र से बसपा का टिकट चाह रहे हैं।
भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सहित तीन नेता शहर उत्तरी से बसपा में संपर्क साध रहे हैं। इसी प्रकार फाफामऊ, हंडिया, शहर दक्षिणी, फूलपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा से निराश दर्जनभर नेता बसपा में दौड़ लगा रहे हैं।
बसपा जिलाध्यक्ष टीएन जैसल का कहना है कि संगठनात्मक रूप से चुनाव को लेकर हमारी तैयारी तेज हो गई है। यही वजह है कि भाजपा के कई नेताओं ने बसपा से टिकट लेने के लिए संपर्क साधा है। कई ऐसे नेता पार्टी में वापसी करना चाहते हैं जो सत्ता जाने के बाद दूसरी पार्टियों में चले गए थे। सबके नाम पर विचार चल रहा है।
