प्रयागराज (राजेश सिंह)। गंगापार के सोरांव तहसील में तैनात चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों के कारनामें सामने आने लगे हैं। इस तहसील क्षेत्र के यूसुफपुर और मोहिद्दीनपुर गांव में किसानों की लगभग 30 बीघा जमीन माफिया के नाम कर दी गई। यह करतूत चकबंदी अधिकारियों ने चकबंदी के दौरान कर दिया, जिसे अमलदरामद के बाद पकड़ा गया।
इस मामले में डीएम ने एसआइटी गठित कर दिया है। जांच टीम में उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी तथा एसडीएम सोरांव को रखा गया है। इसके दो दिन पहले भी सोरांव के चकबंदी अधिकारियों द्वारा दो तालाबों की 24 बीघा जमीन माफिया के नाम कर देने में डीएम ने एसआइटी गठित की थी।
यूसूफपुर और मोहिद्दीनपुर गांव में 18 किसानों की जमीन को भूमाफिया से मिलीभगत कर चकबंदी अधिकारियों व कर्मचारियों ने दूसरे के नाम कर दिया। इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये है। गांव के एक किसान ने कर्ज लेने के लिए खतौनी ली तो उसमें उनका नाम ही नहीं था, यह देख उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के मंडल अध्यक्ष बबलू दुबे के साथ किसानों ने डीएम से इसकी शिकायत की तो एसआइटी गठित हुई। डीएम ने एक हफ्ते में जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इसमें मिलीभगत कर गड़बड़ी में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई व मुकदमा दर्ज कराने के भी निर्देशित किया है।
सोरांव के निगदिलपुर व बरई हरक गांव में स्थित भगवान श्रीआनंद बिहारी विराजमान राधाकृष्ण मंदिर के नाम की लगभग 100 बीघा जमीन की 60 लोगों के नाम पर फर्जी रजिस्ट्री कराने के मामले में उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट के बाद डीडीसी चकबंदी और एसओसी चकबंदी के आदेश पर सभी फर्जी बैनामे खारिज कर दिए गए। फर्जी रजिस्ट्री खारिज करने के बाद फिर भगवान का नाम खतौनी पर चढ़ गया। इसके बाद भी चकबंदी अधिकारियों ने खेल करने बाज नहीं आए।
लगभग 55 करोड़ रुपये कीमत की इस जमीन को लेकर अब अमलदरामद में खेल कर दिया गया। जो नंबर चढ़ना चाहिए था, उसके स्थान पर दूसरा नंबर चढ़ा दिया गया। यही ने इसे दुरुस्त कराने के निर्देश अधिकारियों ने दिए तो सीओ व एसीओ सोरांव सुनवाई करने लगे, जबकि उन्हें इसकी सुनवाई करने का अधिकार ही नहीं है।
