ट्रेनों के 200 किमी की रफ्तार का सपना होगा साकार
प्रयागराज (राजेश सिंह)। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्ततम रेल खंडों में से एक, प्रयागराज-पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीडीडीयू) मार्ग पर अब विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। इस खंड पर बिछाई जा रही तीसरी रेल लाइन परियोजना को गति देते हुए प्रयागराज के यमुनापार में मेजा तहसील के अंतर्गत लेवल क्रासिंग संख्या-18 पर एक अत्याधुनिक दो-लेन वाले रेल ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली गई है। रेलवे द्वारा जारी हालिया अधिसूचना के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जो इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
इस परियोजना के केंद्र में रेलवे की वह महत्वाकांक्षी मिशन रफ्तार योजना है, जिसके तहत प्रयागराज-पीडीडीयू रूट को तेज गति से ट्रेनों को चलाने वाले ट्रैक में बदला जा रहा है। भविष्य में इस रेल लाइन पर ट्रेनों को 160 किलोमीटर से लेकर 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाने का प्रस्ताव है। इतनी उच्च गति के साथ सुरक्षित रेल संचालन के लिए ट्रैक का 'क्रासिंग मुक्त' होना अनिवार्य है। इसी रणनीति के तहत मेजा के फाटक संख्या-18 को बंद कर वहां भव्य ओवरब्रिज बनाया जा रहा है, ताकि रेल और सड़क यातायात दोनों बिना किसी बाधा के अपनी पूरी क्षमता से चल सकें।
जाम से स्थायी मुक्ति : मेजा और आसपास के गांवों के हजारों लोगों को रोजाना रेलवे फाटक बंद होने के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता था। आरओबी बनने के बाद फाटकों के पास लगने वाले लंबे जाम का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
रफ्तार और सुरक्षा : हाई-स्पीड ट्रेनों के आने से प्रयागराज और पीडीडीयू के बीच की दूरी महज चंद मिनटों में पूरी की जा सकेगी। साथ ही, ओवरब्रिज होने से रेल पटरियों पर होने वाले हादसों की संभावना शून्य हो जाएगी।
आर्थिक विकास को गति : मेजा क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। किसानों और व्यापारियों के लिए माल की आवाजाही आसान होगी, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
तीसरी लाइन का लाभ : वर्तमान में दो लाइनों पर दबाव अधिक होने से ट्रेनें अक्सर आउटर पर खड़ी रहती हैं। तीसरी लाइन और आरओबी के समन्वय से ट्रेनों का परिचालन समयबद्ध होगा और मालगाड़ियों के लिए भी अलग से कारिडोर उपलब्ध रहेगा।
अधिग्रहण प्रक्रिया और समय सीमा
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विशेष रेल परियोजना के निष्पादन, अनुरक्षण और संचालन के लिए यह भूमि अनिवार्य है। सक्षम प्राधिकारी/विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी प्रयागराज द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रभावित भू-स्वामियों को अपने दावे और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया है।
बनेगा रेलवे की नई पहचान
प्रयागराज मंडल का यह हिस्सा आने वाले समय में भारतीय रेलवे की नई पहचान बनेगा, जहां यात्रियों को हवाई सफर जैसा अनुभव पटरियों पर मिलेगा। मेजा में बनने वाला यह दो-लेन ओवरब्रिज न केवल सड़क यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि देश की प्रगति में एक नई गति भी प्रदान करेगा।
