प्रयागराज (राजेश सिंह)। घूरपुर थाना क्षेत्र के गौहनिया में किराए के मकान में रह रही एक पीड़िता ने मकान मालिक और जिला सहकारी बैंक के सचिव पर भ्रामक जानकारी देकर डराने-धमकाने, जबरन मकान खाली कराने और घर में रखा पूरा कीमती सामान बेच देने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले में डीसीपी यमुनानगर आईपीएस विवेक चन्द्र यादव के निर्देश पर कार्रवाई शुरू हुई है।
पीड़िता श्रीमती डली पत्नी श्री बिशम्भर सिंह (निवासी भैयानपुर, पहासू) ने थाना घूरपुर को दी तहरीर में बताया कि उनके पति बिशम्भर सिंह जिला सहकारी बैंक जसरा में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे जो वर्तमान में अस्थायी रूप से निलंबित हैं। बैंक में ऋण वसूली के मामलों की जांच के दौरान उनका परिवार साजिश का शिकार हुआ।
उस दौरान वे प्रयागराज के गौहनिया में एक किराए के मकान में रह रहे थे, जो उन्हें जिला सहकारी बैंक के सचिव श्री रामजी पाल (जारी समिति) द्वारा दिलवाया गया था और मकान मालिक निलेश सिंह से परिचय भी उन्हीं ने कराया था।
पीड़िता का आरोप है कि मकान मालिक की पत्नी श्रीमती गुंजन सिंह बार-बार कहती थीं कि जून माह का किराया और दूध का भुगतान न करें, वह राशि वह स्वयं सचिव रामजी पाल से ले लेंगी। जबकि पीड़िता के अनुसार उनका किराया 19 मई तक और दूध का भुगतान 31 मई तक पूरा था।
तहरीर के अनुसार एक दिन सुबह पीड़िता, उनके पति तथा पुत्र किसी आवश्यक कार्य से बाहर गए हुए थे, वापस लौटने पर गुंजन सिंह ने डराते हुए बताया कि उनकी अनुपस्थिति में पुलिस आई थी और पूछताछ कर कहा कि पति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो चुकी है और गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया है। धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि तुरंत मकान खाली नहीं किया तो पुलिस यहीं से गिरफ्तार कर लेगी।
इस झूठी व भ्रामक सूचना से भयभीत होकर परिवार ने *24 जून 2026 को प्रातः लगभग 11:00 बजे* जल्दबाजी में कुछ आवश्यक सामान लेकर मकान छोड़ दिया, जबकि बाकी सारा कीमती घरेलू सामान उसी कमरे में बंद छोड़ दिया। मकान खाली कराते समय गुंजन सिंह ने स्वयं वाहन/ड्राइवर की व्यवस्था कराई और ड्राइवर से बातचीत न करने का निर्देश दिया। उस समय गुंजन सिंह की माता जी भी मौजूद थीं।
पीड़िता के अनुसार मकान छोड़ने के बाद कई बार मकान मालिक को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया। लगभग एक सप्ताह बाद जब बात हुई तो पता चला कि निलेश सिंह एवं गुंजन सिंह ने बिना अनुमति और बिना किसी कानूनी अधिकार के कमरे का ताला खोलकर उनका समस्त घरेलू सामान बेच दिया है।
बेचे गए सामान में गैस चूल्हा, एलपीजी सिलेंडर, इंडक्शन चूल्हा, स्टील के बर्तन, प्रेशर कुकर, केतली, प्लेट, कप, गिलास, स्टोरेज रैक, टिफिन, गैस रेगुलेटर, फ्रिज, प्लास्टिक कूलर, इन्वर्टर एवं बैटरी, विद्युत बोर्ड, गद्दे, तकिए, चादरें, बाल्टी, मग, वाटर कूलर, रसोई का राशन (चावल, आटा, दालें, चीनी, घी, सरसों का तेल, सूखे मेवे, मसाले), कपड़े, पंखे, प्रसाधन सामग्री, जूते-चप्पल तथा अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं एवं कुछ आवश्यक दस्तावेज शामिल हैं।
पीड़िता ने बताया कि उनके पास निलेश सिंह के साथ हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है, जिसमें निलेश सिंह स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें पति के विरुद्ध कथित एफआईआर की जानकारी सचिव रामजी पाल से प्राप्त हुई थी।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि सचिव रामजी पाल, निलेश सिंह, गुंजना सिंह और उनकी माता ने आपस में सांठगांठ कर साजिश के तहत डराकर मकान खाली कराया और सामान गायब कर दिया। यह पूरा क्रम - झूठे वारंट का भय दिखाना, 24 जून को जबरन मकान से निकालना, वाहन की व्यवस्था स्वयं करना और अंततः घरेलू सामान बेच देना - अमानत में खयानत, धोखाधड़ी, चोरी एवं डराने-धमकाने की श्रेणी में आता है।
इसी को लेकर पीड़िता ने डीसीपी यमुनानगर विवेक चन्द्र यादव से न्याय की गुहार लगाई थी। डीसीपी के निर्देश पर अब घूरपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पीड़िता ने नामजद अभियुक्तों सचिव रामजी पाल, निलेश सिंह, गुंजन सिंह व उनकी माता के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करने, कॉल रिकॉर्डिंग व अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल करने और सामान बरामद कर वापस दिलाने की मांग की है।
