शिक्षक दिवस: 35 शिक्षकों को अष्टावक्र गौरव सम्मान
प्रयागराज (राजेश सिंह)। शिक्षक दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम हुआ। इसमें दिव्यांग शिक्षकों और दिव्यांगजनों के लिए अच्छा काम करने वाले 35 शिक्षकों को 'अष्टावक्र गौरव सम्मान' दिया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौधरी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने शिक्षकों को समाज का निर्माता बताया और कहा कि हर शिक्षक को यह देखना चाहिए कि उसने कितनी प्रतिभाओं को निखारा है।
राजर्षि टंडन सेवा केंद्र बैंक रोड में हुए इस कार्यक्रम में न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि कोई इंसान अच्छा बनेगा या बुरा, इसमें शिक्षक की अहम भूमिका होती है। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत भारत तभी बन पाएगा, जब सभी धर्मों, वर्गों और जातियों को साथ लेकर चला जाए।
शिक्षकों की जिम्मेदारी समझाते हुए न्यायमूर्ति चौधरी ने एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि छेनी और हथौड़ी की चोट सहने वाला पत्थर ही भगवान की मूर्ति बनता है। जो पत्थर चोट नहीं सह पाता, वह मंदिर के बाहर नारियल फोड़ने के काम आता है। इसी तरह शिक्षक के मार्गदर्शन और अनुशासन से ही प्रतिभाएं निखरती हैं। उन्होंने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों से अपने काम का आकलन करने के लिए कहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने दिव्यांग शिक्षक और वरिष्ठ समाजसेवी श्रीनारायण यादव के संघर्ष और जज्बे की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जो दिव्यांग शिक्षक और दिव्यांगजन अपनी मेहनत से समाज में जगह बनाते हैं, उन्हें वह सलाम करते हैं।
न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने हिंदी और अंग्रेजी भाषा की अहमियत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी माता है और भारत को समझने के लिए हिंदी भाषा जरूरी है। वहीं, दुनिया से जुड़ने के लिए अंग्रेजी जरूरी है। हालांकि, सिर्फ अंग्रेजी बोलने से कोई व्यक्ति विद्वान नहीं हो जाता। उन्होंने राष्ट्रभक्ति के बारे में कहा कि सिर्फ राष्ट्रगीत या देशभक्ति के गीत गाने से राष्ट्रभक्ति पूरी नहीं होती। राष्ट्रभक्ति के लिए सच बोलना और अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाना भी जरूरी है।
