प्रयागराज (राजेश सिंह)। शक्ति साधना का महापर्व शारदीय नवरात्र में सनातन धर्मावलंबी व्रत और साधना में लीन हैं। मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए दर्शन-पूजन चल रहा है। वैसे तो नवरात्र नौ दिनों की है, लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति है। सनातन धर्म के मर्मज्ञों ने इसे स्पष्ट करते हुए बताया है कि अष्टमी का रविवार (18 अक्टूबर) और नवमी तिथि का व्रत सोमवार (19 अक्टूबर) को रखा जाएगा।
... इसलिए अष्टमी व्रत रविवार को होगा
ज्योतिषाचार्य पंडित कमला शंकर उपाध्याय के अनुसार धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु के अनुसार जिस तिथि का प्रभाव दोपहर और शाम को रहता है, उसका प्रभाव दिनभर माना जाता है। आश्विन शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि रविवार की सुबह 5.54 बजे लगकर सोमवार की सुबह 7.53 बजे तक रहेगी। उक्त तिथि रविवार को दिनभर रहेगी, लेकिन दोपहर और शाम को उसका प्रभाव नहीं है। ऐसे में अष्टमी तिथि का व्रत रविवार को रखा जाएगा।
नौ दिन व्रती दशमी की सुबह 10 बजे से पहले पारण करें
पंडित कमला शंकर उपाध्याय ने बताया कि इसी प्रकार नवमी तिथि सोमवार की सुबह 7.54 बजे से लगकर मंगलवार की सुबह 9.37 बजे तक रहेगी। दोपहर और शाम को उसका भी प्रभाव नहीं है। इसलिए नवमी तिथि का व्रत सोमवार को रखा जाएगा। नौ दिन व्रत रखने वाले साधकों को दशमी तिथि की सुबह 10 बजे से पहले पारण कर लेना चाहिए।
18 अक्टूबर की रात होगी महानिषा पूजा
तंत्र साधकों की महानिषा पूजा 18 अक्टूबर की रात 12.02 बजे से आरंभ होगा सुबह 4.05 बजे तक चलेगी। इसमें तंत्र साधना से मइया को प्रसन्न किया जाता है। इसमें मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप का पूजन किया जाता है, क्योंकि इसी रूप में उन्होंने चंड और मुंड असुरों का वध किया था। वहीं, कन्या पूजन शनिवार को सप्तमी तिथि से आरंभ हो जाएगी।

