प्रयागराज (राजेश सिंह)। माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मौनी अमावस्या के अवसर पर मेला नियमों का उल्लंघन करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में बग्घी से प्रवेश करने के आरोप में दिया गया है। प्राधिकरण ने 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है, अन्यथा भूमि आवंटन रद्द करने और मेले में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।
प्राधिकरण के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या के दिन आपातकालीन उपयोग के लिए आरक्षित त्रिवेणी पांटून पुल नंबर 02 पर लगे बैरियर को तोड़कर संगम अपर मार्ग से बिना अनुमति के बग्घी पर सवार होकर भीड़ के साथ जा रहे थे। मेला पुलिस और प्रशासन लगातार ध्वनि विस्तारक यंत्रों और वायरलेस सेट के माध्यम से संगम क्षेत्र में किसी भी वाहन के प्रवेश पर प्रतिबंध की
घोषणा कर रहा था।
उस समय स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी । यह क्षेत्र स्नानार्थियों की आवाजाही और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील था। स्वामी के इस कृत्य के कारण मेला पुलिस और प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लाखों स्नानार्थियों के स्नान कर रहे संगम नोज तक बग्घी ले जाने का प्रयास किया गया, और रोके जाने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। प्राधिकरण ने इस प्रकार के प्रवेश से भगदड़ और जनहानि की प्रबल संभावना जताई है।
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मेले में खुद को शंकराचार्य बताते हुए बोर्ड आदि लगा रहे हैं। जबकि आधिकारिक तौर पर उनके शंकराचार्य होने पर सर्वोच्च न्यायालय से रोक है। प्राधिकरण ने इसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में बताया है।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है कि उनके इस कृत्य के कारण उनकी संस्था को दी जा रही भूमि और सुविधाओं को क्यों न रद्द कर दिया जाए और उन्हें मेले में प्रवेश से स्थायी रूप से प्रतिबंधित क्यों न कर दिया जाए। यदि निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो यह मानते हुए कि उन्हें कुछ नहीं कहना है, तदनुसार निर्णय पारित कर दिया जाएगा।
