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कला संगम पंडाल में लोक और शास्त्रीय कला का संगम

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मुंबई की तबला वादक अनुराधा पाल ने दी अपनी प्रस्तुति “तबला गाए कहानियां”

प्रयागराज (राजेश सिंह)। माघ मेला क्षेत्र के परेड सेक्टर-3 स्थित संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के कला संगम पंडाल में आज लोक गीत, नृत्य-नाटिका और शास्त्रीय संगीत का मनोहारी आयोजन हुआ। दर्शक लोक गीतों और शास्त्रीय संगीत की गंगा में डूबे नजर आए। पूरा पंडाल संगीत और ताल से गूंज उठा।

मुंबई की तबला वादक अनुराधा पाल ने अपनी प्रस्तुति “तबला गाए कहानियां” से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके तबला वादन के दौरान दर्शक दीर्घा में सन्नाटा छा गया। उन्होंने तबले से डमरू की ध्वनि निकाली और मेले में खरीदारी को लेकर पति-पत्नी के बीच होने वाली नोंक-झोंक को ताल और लय के जरिए जीवंत कर दिया। लोग सांस रोककर उनका वादन सुनते रहे।

प्रयागराज के पं. प्रेम कुमार मलिक, दरभंगा घराना की 12वीं पीढ़ी के कलाकार और राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से सम्मानित गायक, ने राग भीमपलासी और राग शंकरा में शिव स्तुति व गंगा स्तुति प्रस्तुत की। उनकी मधुर आवाज ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

लोक नृत्य ढेड़िया की मशहूर कलाकार बीना सिंह ने अपने साथियों के साथ श्रीराम के विजय के बाद किए जाने वाले ढेड़िया नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली रही कि दर्शक अपनी जगह से हिल तक नहीं सके।

प्रयागराज के ही प्रख्यात कलाकार भूपेंद्र कुमार ने भजन “जरा हल्के गाड़ी हांकों मेरे गाड़ी वाले”, “सीताराम सीताराम कहिए” और गजल “न जी भर के देखा, न बात की” गाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहीं माधवी मधुकर, जो भारत की पहली संस्कृत स्तोत्र गायिका हैं। उन्होंने “त्रिवेणी स्तोत्रम्”, “प्रयाग अष्टकम” के श्लोक “तीर्थराजो जयति प्रयागः”, “अच्युतम केशवम्” सहित कई स्वरबद्ध स्तोत्र प्रस्तुत किए। उनके गायन ने पूरे पंडाल को भक्ति और संगीत में डुबो दिया। हर माह उनके एक करोड़ से अधिक श्रोता उनके गाए स्तोत्रों का आनंद लेते हैं।

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