परिजनों ने जमकर हंगामा किया; लगाया जाम
प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज में नसबंदी के दौरान महिला की मौत हो गई। नैनी के चाका सीएचसी में महिला की नसबंदी की गई। इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर उसे स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल रेफर कर दिया गया। महिला ने शुक्रवार देर शाम इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
घटना के बाद परिजन शव लेकर सीएचसी पहुंचे। महिलाएं लाश को लादकर रोड़ तक लाईं और धरने पर बैठ गईं। सड़क पर जाम लगा दिया। इस दौरान लोगों ने जमकर हंगामा किया। एम्बुलेंस कर्मियों से मारपीट की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन 50 लाख की मांग पर अड़े रहे। करीब 4 घंटे बाद प्रशासन ने समझा-बुझाकर परिजनों को मनाया। 10 लाख मुआवजे का आश्वासन दिया। इसकी लिखा-पढ़ी भी कराई गई। इसके बाद जाम को खुलवाया गया। घटना शुक्रवार शाम 4 बजे की नैनी थाना क्षेत्र के चाका की है।
चाका सीएचसी में लगा था नसबंदी कैंप
मृतका की पहचान रोशनी (28) के रूप में हुई है। शुक्रवार को नैनी के चाका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कैंप लगाया गया था। मुंडी चक निवासी रोशनी अपने पति प्रवेश के साथ सुबह करीब 10 बजे नसबंदी कराने पहुंची थीं। यहां डॉक्टरों ने उन्हें शाम 4 बजे ऑपरेशन का समय दिया।
निर्धारित समय पर सर्जन डॉ. प्रतिमा मिश्रा और डॉ. आशुतोष ने रोशनी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान ही महिला की हालत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों के मुताबिक, वे रोशनी को एसआरएन अस्पताल ले जाने के बजाय जीवन ज्योति अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। आक्रोशित परिजन शव लेकर चाका ब्लॉक सीएचसी पहुंचे। महिलाएं शव को 50 मीटर लादकर सड़क तक लाईं और रोड पर बैठ गईं। हंगामा और जाम की सूचना पर पहुंचे नैनी इंस्पेक्टर ने भीड़ को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन लोग नहीं माने। आक्रोशित भीड़ ने पूरे रास्ते को बंद कर दिया और सड़क पर बैरिकेडिंग लगाकर आवागमन रोक दिया। इससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
डॉक्टर पर केस की मांग
हंगामा बढ़ता देख मौके पर एसीपी करछना सुनील कुमार सिंह पहुंचे। उनके साथ करछना और घूरपुर थाने की फोर्स भी बुला ली गई। मौके पर मौजूद पुलिस और अधिकारी लगातार परिजनों को समझाने और चक्का जाम हटवाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे नहीं माने। परिजनों ने मांग रखी कि संबंधित डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाए। साथ ही मृतका के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा देने की भी मांग की गई।
देवर बोला-हमें इंसाफ चाहिए
मृतका के देवर शुभम ने बताया- रोशनी के 2 छोटे बच्चे हैं। 1 साल का बेटा कार्तिक और 3 साल की बेटी कृतिका। दोनों बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है। अब उन्हें कौन संभालेगा? हमें इंसाफ चाहिए। जब तक कोई अधिकारी 50 लाख रुपए का मुआवजा देने का आश्वासन नहीं देगा, तब तक पोस्टमॉर्टम नहीं कराया जाएगा।
महिला की मौत के बाद परिजनों ने करीब 4 घंटे तक जमकर हंगामा किया। इसके बाद मौके पर तहसीलदार भी पहुंचे। यहां परिजनों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को प्रार्थना पत्र सौंपा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ए.के. तिवारी ने परिजनों से बातचीत कर उनकी मांगें सुनीं। परिजन पहले 50 लाख रुपए की तत्काल मदद पर अड़े थे, लेकिन काफी समझाने-बुझाने के बाद वे 10 लाख रुपए की मांग पर आ गए।
एसीपी करछना सुनील कुमार सिंह ने बताया- परिजनों के विरोध को शांत कराते हुए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। परिवार को 4 लाख रुपए मुआवजा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान और बच्चों के भरण-पोषण के खर्च के लिए शासन को प्रस्ताव भेजकर स्वीकृति दिलाई जाएगी।

