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रोगमुक्त फसलों के लिए शोध करेगा इलाहाबाद विश्वविद्यालय

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वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षकों को मिला 98 लाख का अनुदान, 5 वर्षों में पूरा होगा शोध

प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में फसलों में होने वाले रोग को नियंत्रण करने पर शोध होगा। इसके लिए वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षकों को प्रतिष्ठित एडवांस्ड रिसर्च ग्रांट प्रदान की है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च एजेंसी की ओर से इस शोध के लिए 98 लाख रुपये का अनुदान मिला है। वनस्पति विज्ञान विभाग में डा. रिक्की राय की अगुवाई में फसलों पर बीमारियों के प्रभाव को नियंत्रित करके उन्नत किस्म की फसलों को विकसित करने पर शोध होगा।

इसमें विभाग के ही डा. सुनील कुमार सिंह और हैदराबाद स्थित डीएनए फिंगर प्रिंटिंग एवं निदान केंद्र के डॉ. सुभदीप चटर्जी सह अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगे। शोध पांच वर्षों में पूर्ण करना है। यह शोध का उद्देश्य रोगजनक जीवाणुओं के फसलों को संक्रमित करने के कारणों और निवारणों का पता लगाना है। फसलों में बीमरियां लगने के कारण देश में कृषि उत्पादन में गिरावट और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जीनोमिक व बायोटेक्नोलॉजी तकनीक का प्रयोग

अत्याधुनिक जीनोमिक और बायोटेक्नोलॉजी तकनीकों का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिक दल उन प्रमुख आनुवंशिक कारकों की पहचान करेगा जो फसल की रोग संवेदनशीलता या प्रतिरोध क्षमता को निर्धारित करते हैं। इस संदर्भ में डॉ. रिक्की राय ने बताया कि देशभर के किसान फसलों में जीवाणु जनित बीमारियों के कारण हर वर्ष भारी क्षति झेलते हैं। इस परियोजना के माध्यम से हमारा लक्ष्य यह समझना है कि ये जीवाणु पौधों को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं, ताकि हम अधिक मजबूत और रोग‑प्रतिरोधी फसलें विकसित कर सकें, जिससे फसल‑हानि कम हो, उत्पादन बढ़े और अंततः हमारे किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि परियोजना के निष्कर्षों से रोग प्रतिरोधी फसल किस्मों का विकास, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता में कमी, और सतत कृषि को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों को फसल‑हानि में कमी, बेहतर उपज और आय में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होने की संभावना है।

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