आगरा। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने एक बार मथुरा और काशी मुद्दा उठाया है। कहा-मथुरा और काशी हमें दे दो, हमें तुम्हें दही और बूरा खिलाएंगे। वहीं, उन्होंने प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शंकराचार्य घटना पर कहा-इस विषय पर मैं धर्मसंकट में हूं। फिर भी ये कहूंगा, संतों के साथ मारपीट ठीक नहीं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को जीआईसी मैदान पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में कथावाचक ने समुदाय विशेष पर जमकर निशाना साधा।
हिंदू सम्मेलन के बाद प्रेसवार्ता के बाद देवकीनंदन ठाकुर ने कहा-ये मेरे के लिए धर्मसंकट का समय है। दोनों ही अपने हैं। एक तरफ तो शंकराचार्य जैसा भगवान है, दूसरी तरफ वो लोग भी हैं जो बहुत बड़ी संख्या में स्नान के लिए आए लोगों की चिंता कर रहे थे।
इसलिए मेरे लिए धर्मसंकट का समय है। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा, ऐसी सिचूएशन को बढ़ाना नहीं चाहिए। आपसी मतभेद भुलाकर प्यार से प्रत्येक सनातनी को एक स्वर में बैठकर सुलझाना चाहिए, उसे उलझाना नहीं चाहिए।
आगरा में आयोजित हिंदू सम्मेलन में गाय की पूजा करते कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर।
आगरा में आयोजित हिंदू सम्मेलन में गाय की पूजा करते कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर।
कथावाचक ने कहा-प्रशासन को भी चाहिए कि जिसके माथे पर तिलक हो, जिसके सिर पर शिखा हो और जिसने भगवाधारण किया हो, उस प्रशासन को ये समझना है कि उसे आदर से रख सकते हैं, ऐसे मारपीट से ठीक नहीं है।
हिंदू सम्मेलन का एकमात्र उद्देश्य है, सभी हिंदू एकसाथ आगे बढ़ें।
लोग हमें बांटने का प्रयास कर रहे हैं, लोग हमें लड़ाने का प्रयास कर रहे हैं, उस प्रयास को निष्फल करें, उसे कामयाब न होने दें। ऊंच-नीच छोड़कर सभी सनातनी एक साथ अपनी आने वाली जनरेशन के लिए काम करें, धर्म के लिए काम करें और अपने देश के लिए काम करें।
हिंदू सम्मेलन में उठा ताजमहल का मुद्दा
हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा-आगरा की पहचान ताजमहल से क्यों होनी चाहिए? क्या यहां यमुना नहीं हैं, यहां मंदिर नहीं हैं, क्या यहां अकेला ताजमहल ही है, जिसके लिए आगरा को फेमस कर दिया। हम क्या किसी की कब्र देखने जाएंगे...हम इतने फ्री हैं कि किसी की कब्र देखेंगे। जिसे शौक हो, वह जाओ कब्रों को देखो...आई डोंट केयर।
कृष्ण जन्मभूमि का के लिए उठाई आवाज
कथावाचक ने कहा-हम ताजमहल से पहले कृष्ण जन्मभूमि को देखना चाहते हैं, हमें वहां कृष्ण जन्म की पवित्र पावन भूमि पर मेरे ठाकुरजी का मंदिर चाहिए।
लोग कहेंगे कि देवकी नंदन ठाकुर हिंदू-मुस्लिम कर रहा रहा है। लेकिन मैं बता दूं, मैं ऐसा नहीं कर रहा। मैं सौगंध खाता हूं, मथुरा और काशी हमें दे दो, हम तुम्हें दही और बुरा खिलाएंगे। हमारे ठेठ ब्रज हैं इसलिए हमारे यहां दही-बूरे के बिना अच्छी दावत नहीं मानी जाती।
तुम हमें दे दो कृष्ण जन्मभूमि, हमें दे दो काशी विश्वनाथ, हम प्रोमिस करते हैं कि हम तुम्हें दही और बुरे की दावत देंगे। दो कदम हम चलते हैं, दो कदम तुम चलो, आओ मिलकर निभाए भाईचारा लेकिन ऐसा होगा नहीं।
अयोध्या में भी मंदिर तोड़ देंगे, काशी में भी मंदिर तोड़ देंगे और मथुरा में भी मंदिर तोड़ देंगे, ऊपर से आशा करोगे कि हम तुम्हारे साथ भाईचारा निभाएं और तुम हमें चारा समझकर खा जाओ, ये बहुत हो चुका, अब नहीं हो सकता। बहुत सह लिया, अब न सहेंगे, हिंदू हक लेकर रहेंगे।
जनसंख्या बढ़ाने पर जोर
देवकीनंदन ने हिंदुओं से जनसंख्या बढ़ाने के लिए कहा। कार्यक्रम में शामिल पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी की ओर इशारा करते हुए कथावाचक ने कहा-ये बहन विधवा नहीं होती, अगर कश्मीर में हिंदुओं की संख्या ज्यादा होती। सोचिए, अगर वहां 4 लाख हिंदू होते और 4 हजार मुस्लिम होते तो क्या वे लोग धर्म पूछकर गोली चलाते।
ठाकुरजी को उनका स्थान दिलान के लिए मेरा कदम आगे बढ़ता रहेगा। इसी आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में केशवदेव की मूर्ति को दबा दिया गया है। तो आप ही बताइये, क्या हम अपमान सहते रहे या फिर अपने ठाकुरजी को सम्मान के साथ जामा मस्जिद की सीढ़ी के नीचे निकालकर मथुरा में सही जगह पर स्थापित करें और अयोध्या की तरह भव्य और दिव्य मंदिर बनवाएं।
