विरोध से बचने ऊर्जा मंत्रालय ने यूपी से कर्मचारीदृउपभोक्ता संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया
प्रयागराज (राजेश सिंह)। केंद्र सरकार ने वित्तीय बजट के दौरान पेश होने वाले विद्युत (संशोधन) बिल 2025 पर आम सहमति बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने यूपी सहित देश भर के कर्मचारीदृउपभोक्ता संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया है। इसके बाद देश भर के ऊर्जा मंत्रियों की भी बैठक होगी।
इसमें ये बताने का प्रयास होगा कि क्यों बिजली संशोधन बिल जरूरी है। हालांकि बिजली कर्मचारी संगठन और उपभोक्ता संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। वे साफ आरोप लगा रहे है कि ये सारी कवायद बिजली जैसे सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने का षड्यंत्र है।
12 जनवरी को कर्मचारियों-इंजीनियरों की बैठक, 13 को उपभोक्ता और उद्योग जगत से चर्चा
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने बिल के मसौदे पर सहमति बनाने के लिए 12 जनवरी को दिल्ली के श्रम शक्ति भवन में बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों के संगठनों की बैठक बुलाई है। केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में होने वाली इस मीटिंग में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (।प्च्म्थ्), नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स समेत करीब 45 संगठनों को बुलाया गया है।
वहीं, 13 जनवरी को अपराह्न 3 बजे प्रमुख औद्योगिक, व्यवसायिक और उपभोक्ता संगठनों के साथ महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में यूपी से राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद को बुलाया गया है।जबकि 22-23 जनवरी को सभी राज्यों के बिजली मंत्रियों और अधिकारियों की बड़ी मीटिंग प्रस्तावित है। इस बैठक में बिल और निजीकरण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की बात कही जा रही है।
कर्मचारियों ने दी हड़ताल की चेतावनी
चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने साफ कहा- ष्अगर बजट सत्र में बिल पारित कराने की एकतरफा कोशिश हुई तो 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने भी चेताया कि अगर मीटिंग में उनके सुझावों पर सार्थक चर्चा नहीं हुई तो वो भी राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होगी। दुबे ने याद दिलाया कि 2014 से अब तक छक्। सरकार पांच बार संशोधन बिल ला चुकी है, लेकिन कर्मचारियों-किसानों के विरोध से हर बार असफल रही।
उपभोक्ताओं का पक्ष मजबूती से रखेंगे अवधेश वर्मा
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि 13 जनवरी को उन्हें भी बैठक में आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल संशोधन के माध्यम से सरकार सरकारी नेटवर्क से निजी कंपनियों को बिजली सप्लाई की इजाजत सार्वजनिक संपत्ति का अप्रत्यक्ष निजीकरण करना चाहती है। लेकिन इसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वर्मा ने कहा वर्तमान कानून का उल्लंघन क्यों? उपभोक्ताओं के हित प्रभावित करने वाले हर प्रावधान का विरोध करेंगे।ष्
इन बिंदुओं पर उपभोक्ता परिषद दर्ज करा चुका है आपत्ति
स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य करने का विरोध (विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) में पोस्टपेड-प्रीपेड का विकल्प है)।
राज्य विद्युत नियामक आयोगों की स्वतंत्रता।
उद्योगों को क्रॉस सब्सिडी में छूट।
यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन में छूट।
उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को सिर्फ सरकारी क्षेत्र में मजबूत करने की मांग।
क्या है बिल में विवाद?
बिल में निजी कंपनियों को डिस्ट्रीब्यूशन में प्रवेश, क्रॉस सब्सिडी खत्म करने, बड़े उपभोक्ताओं को डिस्कॉम की अनिवार्य सप्लाई से छूट जैसे प्रावधान हैं। सरकार इसे उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और रिन्युएबल एनर्जी को प्रमोट करने का दावा करती है, लेकिन इसे निजीकरण का रास्ता बताकर विरोध किया जा रहा है। निजीकरण से किसान-गरीब उपभोक्ताओं के बिल बढ़ेंगे और कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ेंगी।
