प्रयागराज (राजेश सिंह)। मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर पुलिस द्वारा संतों और बटुकों को पीटने पर धर्माचार्यों ने षड्यंत्र की संभावना व्यक्त की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर अशोभनीय टिप्पणी होने पर नाराजगी व्यक्त की। विश्व हिंदू परिषद के परेड मैदान स्थित शिविर में बुधवार को आयोजित संत सम्मेलन में विभिन्न सम्प्रदाय के धर्माचार्य शामिल हुए।
अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा, संतों और बटुकों को चोटी पकड़कर मारना, उनके कपड़े फाड़ना अक्षम्य है। यह षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि माघ मेला की ख्याति देश-विदेश में मिनी कुंभ के रूप में थी। करोड़ों लोग स्नान के लिए प्रयाग आ रहे थे। मेला क्षेत्र का माहौल खराब करके सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है। जिससे दुनियाभर में संदेश जाए कि योगी सरकार संतों को पिटवा रही है। सरकार इसकी जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करे।
उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर अशोभनीय टिप्पणी करने पर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि तथाकथित शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी को लेकर जिन शब्दों का प्रयोग किया है वो स्वीकार करने योग्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म का मान बढ़ाया है। प्रयाग, काशी, मथुरा, अयोध्या, विंध्याचल के उपेक्षित मंदिरों का जीर्णेद्धार करके सनातन धर्म का मान बढ़ाया है। उनका परिवार आज भी गरीबी में रह रहा है। केंद्रीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने मंदिरों के अधिग्रहण, मतांतरण, लव जिहादका पर चिंता व्यक्त की।
कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होकर इसका मुकाबला करना होगा। कहा कि जहां 2011 की जनगणना में 12 पादरी थे आज उनकी संख्या बढ़कर 65000 हो गई है। मतांतरण पर हिंदू समाज का जागरण करना है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मंदिरों के अधिग्रहण का विषय बड़ा है। मंदिरों का धन गोशाला, गुरुकुल और हिंदू समाज की गतिविधियों पर खत्म होना चाहिए।
कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर रोक लगनी चाहिए। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगदगुरु नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदू समाज से कुरीतियों का समापन करना होगा। संस्कार और संस्कृति को लेकर जो चुनौतियां हैं उसे मिलकर दूर करने की जरूरत है। केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने संचालन किया।
इस दौरान महंत दुर्गा दास, घनश्यामाचार्य, बालक दास, चंद्रदेव मिश्र, रमन गिरि, सनातन महाराज, रंजितेसानंद, आनंद ध्यान मूर्ति मां, जय रामदास, कौशल्यानंद, छोटू महाराज काशी प्रांत अध्यक्ष केपी सिंह, संगठन मंत्री नितिन आदि मौजूद रहे।
