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भारत-चीन को साथ लेकर दोस्त रूस ने बनाया ऐसा तगड़ा प्लान

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टैरिफ तो उन्होंने ऐसा हथियार बना लिया है कि बातबात पर उसकी धमकी देते रहते हैं। ऐसे में हर कोई चाहता है कि धमकीबाज ट्रंप की इन हरकतों से कैसे छुटकारा मिले। वैसे तो ट्रंप के खिलाफ अब यूरोप के देशों ने भी मोर्चा खोल दिया है...

अब वो वक्त दूर नहीं है जब ट्रंप की हरकतों की वजह से अमेरिका अपनी बर्बादी खुद देखेगा। जिसकी तैयारी शुरू हो गई है। इस वक्त दुनिया भर के देश अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की तानाशाही और दादागिरी से परेशान हैं। सुपर पावर की सनक में ट्रंप किसी भी देश को झुकाने के लिए उस पर दबाव डालने लग जाते हैं और जो देश उनके हिसाब से नहीं चलता उसमें वो तख्ता पलट कराने की कोशिशों में जुट जाते हैं। टैरिफ तो उन्होंने ऐसा हथियार बना लिया है कि बातबात पर उसकी धमकी देते रहते हैं। ऐसे में हर कोई चाहता है कि धमकीबाज ट्रंप की इन हरकतों से कैसे छुटकारा मिले। वैसे तो ट्रंप के खिलाफ अब यूरोप के देशों ने भी मोर्चा खोल दिया है। लेकिन अभी भी दुनिया की निगाह उन तीन महाशक्तियों पर है जो ट्रंप का अच्छा खासा इलाज कर सकती हैं। वो महाशक्तियां हैं भारत, रूस और चीन। जहां रूस अभी यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है और मौके के साथ ही ट्रंप को भी सबक सिखा रहा है।

चीन भी अमेरिका को कुछ हद तक टक्कर दे रहा है। लेकिन भारत इन दिनों ट्रंप को खुलेआम चुनौती दे रहा है। भारत को झुकाने के लिए ट्रंप अब तक 50ः टेरिफ लगा चुके हैं। और भी टेरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। लेकिन फिर भी भारत डटकर सामना कर रहा है।  ट्रंप के हर हथियार की काट कर रहा है। इसीलिए तो ट्रंप बुरी तरह से बौखलाए हुए हैं। ट्रंप को पता है कि भारत में ना तो तख्तापलट वाली साजिश काम आएगी और ना ही भारत इतना कमजोर है कि टेरे से उसका सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। क्योंकि भारत हर मुश्किल में अवसर तलाशने के लिए जाना जाता है। लेकिन अब भारत के दोस्त रूस ने एक ऐसा ऐलान किया है कि जिसने ट्रंप की मुसीबत बढ़ा दी है। दरअसल रूस ने अमेरिका की अकड़ ढीली करने के लिए भारत और चीन को एक साथ आने की अपील की है। रूस के विदेश मंत्री सरगई लावरो ने रिक यानी रूस भारत चीन का त्रिपक्षीय गठबंधन फिर से शुरू करने का आह्वान किया है। जिससे दुनिया को मल्टीपोलर रखा जा सके।

उन्होंने कहा है कि हमें रिक्त त्रिपक्षीय प्रारूप को सक्रिय करने की जरूरत है जो एक तरह से ब्रिक्स की नींव है जो एक बहुवीय दुनिया का एक प्रमुख तत्व है। इससे कुछ महीनों पहले भी रूस इसे एक्टिव करने की अपील कर चुका है।  साथ ही चीन भी इसे शुरू करने की भारत के आगे गुहार लगा चुका है। चीनी प्रवक्ता ने तो यहां तक कह दिया था कि रिक गठबंधन भारत, रूस और चाइना के लिए बेहद जरूरी है। चीन, भारत और रूस के साथ यह गठबंधन करने को तैयार है। 

 रिक फोरम की 20 बैठकें भी हो चुकी हैं। लेकिन जून 2020 में भारत और चीन के बीच गलवान में हुई झड़प के बाद यह गठबंधन निष्क्रिय हो गया। मगर अब इसे फिर से एक्टिव करने की बात कही जा रही है। अगर ऐसा हो जाता है तो तीनों देश दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य और आर्थिक ताकत बन जाएंगे और सरपंच ट्रंप के लिए बड़ी मुश्किल भी खड़ी कर देंगे। यानी कि कोई भी देश रिस्क से पंगा लेने से पहले हजार बार सोचेगा। 

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