प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज विद्वत् परिषद के द्वारा महर्षि भारद्वाज जयंती एवं प्रयागराज दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर शोभायात्रा निकाली गयी जो आश्रम से संगम घाट तक पहुंची और घाट पर गंगा पूजन किया गया। शोभायात्रा और गंगा पूजन बड़ी संख्या में साधु-संत, धर्माचार्य उपस्थित रहे। सभी ने प्रयागराज के प्रथम गुरु माने जाने वाले महर्षि भारद्वाज को पुष्पांजलि अर्पित की और घाट पर मंत्रोचारण के साथ गंगा पूजन किया।
माघ मास की पंचमी तिथि को महर्षि भारद्वाज की जयंती मनाई जाती है। माना जाता है कि वे प्रयागराज के प्रथम ज्ञात महान गुरु थे। उन्होंने हवा में उड़ने वाले यंत्र का आविष्कार किया था, आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं और माघ मेला तथा कुंभ मेला के प्रवर्तक भी थे। सुबह-सवेरे उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को याद किया गया।
महर्षि भारद्वाज के जन्मोत्सव के दिन ही प्रयागराज दिवस भी मनाया जाता है। जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी ने पुलिस बैंड के साथ महर्षि को सम्मान दिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत महर्षि भारद्वाज की प्रतिमा की शोभायात्रा संगम तक निकाली जाएगी, जहां गंगा पूजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं ने महर्षि भारद्वाज को माघ मेला और कुंभ मेला का जनक बताते हुए उनके योगदान को नमन किया।
इस अवसर पर धर्माचार्यों ने प्रयागराज को तीर्थ क्षेत्र घोषित करने तथा संगम से पांच कोस की परिधि में मांस और मदिरा की सार्वजनिक बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग रखी। जिलाधिकारी ने इस मांग पर सकारात्मक आश्वासन दिया।
समारोह में महंत श्रीधरानंद, महंत यमुनापुरी (सचिव, महानिर्वाणी अखाड़ा), जगदगुरु श्रीधराचार्य वैकुण्ठ धाम, नित्यनाथाचार्य जी, चंद्रदेव जी (सच्चा आश्रम), राधामाधव दास, जगदगुरु नारायणा शांडिल्य, संयोजक वीरेन्द्र पाठक, अभिषेक माघ, आशुतोष शुक्ल, शशिकांत मिश्र, विक्रम मालवीय, धीरज द्विवेदी, शैलेंद्र अवस्थी, डॉ. प्रमोद शुक्ला, राहुल दुबे, संदीप शर्मा, अनिल मिश्र, सुधीर द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य लोग पुष्पांजलि कार्यक्रम में शामिल रहे।

