10 मार्च को लखनऊ में धरने का किया आह्वान
प्रयागराज (राजेश सिंह)। माघ मेले का परेड मैदान रविवार को किसानों के शत-प्रतिशत कर्ज की माफी और पांच हजार रुपये वृद्धावस्था पेंशन की मांग से गूंज उठा। ऐसे ही तमाम मुद्दों पर चिंतन-मनन के लिए देश के कोने-कोने से किसान यहां जुटे थे। अवसर था भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के राष्ट्रीय अधिवेशन का, जिसमें राष्ट्रीय व प्रांतीय नेताओं ने सरकार पर निशाना भी साधा।इसके अलावा 10 मार्च को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरकार को घेरने का एलान किया।
हरियाणा, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई प्रांतों से किसान इसमें शामिल हुए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अंबावता ने कहा कि देश में जो सरकार है उसकी विचारधारा किसानों से मेल ही नहीं खाती। किसानों की जमीन लूटी जा रही है, खाद के लिए वह भटक रहे हैं। धान खरीद केंद्रों में बिचौलिए हावी है। कहा कि इस अधिवेशन में कर्जमाफी, आयोग का गठन, जमीनों को कब्जा मुक्त कराने, निजी अस्पतालों में निश्शुल्क इलाज का 60 फीसदी कोटा निर्धारित करने और ईवीएम से चुनाव बंद कराने का मुद्दा उठाएंगे।
ऋषिपाल ने कहा कि 2027 में यूपी का विधानसभा चुनाव होना है। इसमें किसान तय करके मतदान करेंगे। जो किसानों का कर्ज माफ करेगा और पेंशन बढ़ाएगा, उसी के साथ रहेंगे। बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर 10 मार्च को 25 हजार किसानों के साथ लखनऊ में धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीस गाजी, राष्ट्रीय महासचिव रामपाल अंबावता, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, राष्ट्रीय सचिव ओम सिंह गुर्जर, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार पांडेय, हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष दिलबाग सिंह हुड्डा, पश्चिमी यूपी के अध्यक्ष रवींद्र प्रधान, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रामानुज ने भी विचार व्यक्त किए।
सदस्यों की लड़ाई ही लड़ेगा भाकियू
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी प्रदेश अध्यक्षों व जिलाध्यक्षों को संगठन की मजबूती का लक्ष्य भी दिया। कहा कि हर जिले में कम से कम पांच-पांच सौ नए सदस्य जोड़े जाएं। 100 रुपये की सदस्यता शुल्क के अलावा इनसे कोई पैसे नहीं लिया जाएगा। कहा कि अब संगठन सिर्फ अपने सदस्यों की लड़ाई लड़ेगा। हर किसी के लिए आंदोलन नहीं होंगे। जिलों में धरना-प्रदर्शन के लिए पहले अनुमति लेनी होगी।
