प्रयागराज (राजेश सिंह)। देश में फर्जी किसान नेताओं ने अपना मायाजाल फैला रखा है। ऐसे-ऐसे लोग किसान नेता बनकर बैठे हैं, जिनके पास अपनी एक इंच भूमि भी नहीं है। यही नहीं, कबाड़ वाले भी भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का तमगा लगाकर घूम रहे हैं। गंगा सागर व त्रिवेणी घुमाने के नाम पर यह किसानों से पांच-पांच सौ रुपये वसूलते हैं। फैक्ट्री मालिकों व सड़क बनाने वाले ठेकेदारों को धमका कर अवैध वसूली करना ही इनका धंधा बन गया है। दैनिक जागरण से विशेष बातचीत के दौरान भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अंबावता ने यह दावा किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देश में भारतीय किसान यूनयिनों की बाढ़ आ गई है। लगभग 288 संगठन बन गए हैं। इनमें से भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) और भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) को छोड़ दें तो अन्य सभी 286 संगठन फर्जी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि किसान संगठन बनाकर किसानों को लूटने का गोरखधंधा चल रहा है। पहले किसी न किसी नाम से एनजीओ का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है।
बाद में उसके नाम के आगे भारतीय किसान यूनियन जोड़ दिया जाता है। जो पूरी तरह से गलत है। इन फर्जी संगठनों के पदाधिकारी किसानों को गंगासागर, त्रिवेणी, राजस्थान घुमाने के नाम पर 200 से 500 रुपये वसूलते हैं। इसके अलावा जब कहीं सड़क बनती है तो वहां जाकर खड़े हो जाते हैं। गुणवत्ता की कमी बताकर ठेकेदार से मोटी रकम ऐंठ लेते हैं। फैक्टरी मालिकों से भी इसी तरह दबाव बनाकर धन उगाही की जाती है। फर्जी संगठनों के पदाधिकारियों की कमाई का यही जरिया है। ऐसे फर्जी संगठनों के नेताओं ने ही कभी किसानों को एकजुट नहीं होने दिया। इनकी जांच कराने व कार्रवाई करने की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन ध्यान ही नहीं दे रहा है।
जमीन है नहीं, फिर भी बने राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अंबावता ने बताया कि हरियाणा में दवा का कारोबार करने वाला एक शख्स भी एक किसान संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गया है। जबकि, उसके पास न तो जमीन है और न ही वह खेती करता है। कबाड़ के व्यवसाय से जुड़े लखनऊ के एक व्यक्ति अपना एक किसान संगठन बना रखा है, जिसमें वह राष्ट्रीय अध्यक्ष है। मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद समेत अन्य जनपदों में भी ऐसी ही स्थिति है।
