प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाहित होने की बात छिपाकर युवती से 11 साल तक यौन संबंध बनाने और मारपीट कर भगाने के अभियुक्त को राहत देने से इन्कार कर दिया है।
केस कार्यवाही रद करने की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह साक्ष्य का विषय है कि पीड़िता को आरोपित के शादीशुदा होने की पहले से जानकारी थी अथवा नहीं, इसलिए केस कार्यवाही रद नहीं की जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने दिया है।
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के आरोपों की जांच कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अभियुक्त कुलदीप वर्मा शिक्षक है और यह जानता था कि पीड़िता से शादी नहीं कर सकता, क्योंकि वह पहले से ही शादीशुदा है, फिर भी उसने संबंध बनाए। प्रथमदृष्टया तथ्यों के आधार पर आरोप पत्र व कार्यवाही रद करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिलता।
थाना क्वारसी में यह मामला बीएनएस 2023 की धारा 69 (धोखाधड़ी से यौन संबंध बनाना), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 351(3) (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज है। एफआइआर 20 जून 2025 को दर्ज कराई गई।
