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हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी की सजा को रद्द किया

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डॉक्टर- मजिस्ट्रेट के सामने रेप पीड़िता की चुप्पी ने संदेह पैदा किया

प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण और बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने ऐसा यह देखते हुए किया कि पीड़िता ने अपनी चिकित्सा जांच के दौरान या न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत दिए गए अपने बयान में जबरन यौन उत्पीड़न के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया था।

न्यायमूर्ति अचल सचदेव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पीड़िता द्वारा मुकदमे के दौरान मजिस्ट्रेट को दिए गए अपने दोषमुक्ति संबंधी बयानों से मुकर जाने (पीछे हटने) से उसकी सत्यनिष्ठा पर संदेह पैदा होता है और इससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो गया है।

न्यायालय ने चिकित्सा परीक्षण रिपोर्ट और योनि स्मीयर रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसने अभियोजन पक्ष के इस दावे का खंडन किया कि पीड़िता का अपहरण किया गया था और अपीलकर्ता द्वारा उसके साथ जबरन बलात्कार किया गया था।

इस प्रकार पीठ ने आरोपी (भगवत कुशवाहा) द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसने विशेष न्यायाधीश झांसी के सितंबर 2019 के उस फैसले को चुनौती दी थी , जिसके द्वारा उसे आईपीसी की धारा 366 (अपहरण, किसी महिला को अगवा करना या उससे जबरन शादी कराने के लिए प्रेरित करना) और धारा 376 (बलात्कार) के तहत दोषी ठहराया गया था।

मामले के अनुसार, 28 मई, 2015 को लड़की के पिता ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें कहा गया था कि उनकी बेटी लापता हो गई है और उसका अपहरण भगवत ने किया है। पीड़िता को अगले दिन पुलिस ने बरामद कर लिया।

पुलिस ने उसका बयान दर्ज किया और 30 मई को उसकी चिकित्सा जांच कराई गई। 4 जून को मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान दर्ज किया गया, जिसमें उसने बलात्कार या अपहरण की कोई शिकायत नहीं की । आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया।

मुकदमे की सुनवाई के बाद, आरोपी को दोषी पाया गया और उसने अपनी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कहा गया कि पीड़िता नाबालिग (लगभग 17-18 वर्ष की आयु) थी और उसके साथ उसकी सहमति से यौन संबंध थे। न्यायालय ने मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज पीड़िता के बयान पर बहुत अधिक भरोसा जताया , जिसमें उसने स्वीकार किया था कि वह अपीलकर्ता से प्यार करती थी और अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी।

पीड़िता ने बाद में ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपना रुख बदल दिया और दावा किया कि उसे अपीलकर्ता द्वारा अगवा कर बलात्कार किया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनके द्वारा पहले दिए गए शपथ पत्र से मुकर जाने को संदिग्ध माना और कहा कि ष्मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान से मुकर जाना गवाह की सत्यनिष्ठा पर संदेह पैदा करता हैष्।

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दिए गए बयान को ष्मामूली आधारोंष् या केवल इस दावे के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि मजिस्ट्रेट ने इसे गलत तरीके से दर्ज किया है। न्यायालय ने यह भी गौर किया कि डॉक्टर को दिए गए अपने बयान में भी, जो कि सबसे पहला बयान था, उसने बल प्रयोग का जिक्र नहीं किया था और केवल इतना कहा था कि वह अपीलकर्ता के साथ झांसी गई थी।

अदालत ने पीड़िता की कहानी को तार्किक रूप से कमजोर पाया। उसने दावा किया कि उसे रात में जबरन उसके घर से ले जाया गया और उसने शोर मचाया, लेकिन उसके माता-पिता के उसी घर में सोए होने के बावजूद किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। उच्च न्यायालय ने यह ष्अत्यधिक संभावितष् पाया कि यदि अपहरण के दौरान उसने वास्तव में शोर मचाया होता, तो उसके माता-पिता सोते नहीं रहते।

न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले में खामियां पाईं, जहां अभियोजन पक्ष द्वारा अपने प्रारंभिक सबूत के बोझ को पूरा करने में विफल रहने के बावजूद आरोपी को अनिवार्य रूप से अपनी निर्दाेषता को साबित करने के लिए मजबूर किया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि दोषसिद्धि पूरी तरह से पीड़िता के बयान पर आधारित थी, जो विरोधाभासों से भरा था। यहां तक ​​कि चिकित्सा रिपोर्ट में भी हाल ही में हुई यौन गतिविधि या बाहरी चोटों के कोई संकेत नहीं थे।

अदालत ने निचली अदालत की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उसने वकील के इस तर्क को खारिज कर दिया कि चिकित्सा परीक्षण और योनि स्मीयर रिपोर्ट अपीलकर्ता के खिलाफ अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं करती हैं।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि पीड़िता और अपीलकर्ता के बीच संबंध था और पीड़िता ने अपनी मर्जी से अपने पिता का घर छोड़ा था। न्यायालय ने यह भी पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं था जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि पीड़िता को उसकी इच्छा के विरुद्ध बहला-फुसलाकर ले जाया गया था। परिणामस्वरूप हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला और आदेश रद्द कर दिया गया और आरोपी को आरोपों से बरी कर दिया गया।

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