प्रयागराज (राजेश सिंह)। दया निधान पाण्डेय, संयुक्त सचिव, भारत सरकार/नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजनान्तर्गत जिला कार्य योजना की समीक्षा शुक्रवार को संगम सभागार में की गई। बैठक में मनीष कुमार वर्मा जिलाधिकारी, हर्षिका सिंह मुख्य विकस अधिकारी, परियोजना निदेशक ग्राम विकास अभिकरण, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, मुख्य पशु चिकत्साधिकारी, जिला विकास अधिकारी नाबार्ड, जिला उद्यान अधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र नैनी एवं छाता के प्रतिनिधि, भूमि संरक्षण अधिकारी, सहायक निदेशक मृदापरीक्षण एवं कल्चर, कृषि रक्षा अधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, दुग्ध विकास अधिकारी, सिचाई विभाग समेत योजनान्तर्गत समस्त 11 विभागो के जनपदीय अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी द्वारा जनपद का आधार भूत आंकडे प्रस्तुत किये गये। उसके उपरान्त जिला स्तरीय 06 वर्षीय प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना की कार्य योजना प्रस्तुत की गई, जिसमें जिला कार्य योजना की समीक्षोपरान्त केन्द्रीय नोडल अधिकारी द्वारा जिला कार्य योजना में सुधार हेतु विस्तृत दिशा निर्देश दिये गये, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा आश्वस्त किया गया कि 01 सप्ताह के अन्दर सभी विभागो की पुनः बैठक कर निर्देशानुसार कार्य योजना में आवश्यक सुधार कर लिया जायेगा, साथ ही यह भी आश्वस्त किया गया कि योजनान्तर्गत सभी विभागो की बैठक प्रत्येक 15 दिवस में आयोजित कर विस्तृत समीक्षा की जायेगी, जिस हेतु मुख्य विकास अधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश निर्गत किये गये। बैठक से पूर्व नोडल अधिकारी द्वारा विकास खण्ड श्रंगवेरपुर के मेण्डारा ग्राम में किसान चौपाल लगाया गया एवं प्रदर्शनों का निरीक्षण किया गया।
नोडल अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री धन धान्य योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास सम्भव है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़वा दिया जाये तथा कृषकों को भूमि की गुणवत्ता के अनुसार फसल चयन के लिए प्रेरित किया जाये। उन्होंने कहा कि किसानों को तकनीकी की जानकारी देके उन्हें गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए जागरूक किया जाये, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके। कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र नवीन तकनीक से किसानों को प्रशिक्षित किया जाये तथा कृषि सम्बंधी सभी योजनाओं का प्रचार-प्रसार प्रभावी ढंग से किसानों के बीच किया जाये। साथ ही किसानों से फीडबैक लेकर योजनाओं में सुधार किया जाय,ताकि कृषि उत्पादकता और किसानों की आय दोनो में वृद्धि हो सके।
