प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शुरु में शादी झूठा वायदा कर सेक्स संबंध बनाना अपराध है, किंतु सहमति से शारीरिक संबंध बनाने के बाद शादी से इंकार करना बलात्कार का अपराध नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने कहा शादी का झूठा वायदा कर सेक्स संबंध बनाया है, इसे साबित किए बगैर किसी को अपराध का दोषी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सहमति से बालिग लड़की ने चार महीने में दो बार सेक्स संबंध बनाया और बाद में शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर आपराधिक केस दर्ज कराया, इससे शादी का झूठा वायदा कर सेक्स संबंध बनाना साबित नहीं होता। एफआईआर में कोई भी आरोप एस सी/ एस टी एक्ट के अपराध का नहीं है और धमकी देने का भी कोई प्रमाण नहीं है।ऐसे में आपराधिक केस जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग होगा।
कोर्ट ने अभिनाश शर्मा उर्फ अविनाश शर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक केस कार्यवाही रद्द कर दी है। याची के खिलाफ आजमगढ़ के बिलरियागंज थाने में शादी का झूठा वायदा कर बलात्कार का आरोप लगाते हुए एस सी / एस टी एक्ट के अपराध की एफआईआर दर्ज की गई थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप सही मान लिए जाय तो भी उसके विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता। पीड़िता बालिग है सहमति से सेक्स संबंध बने हैं, जो अपराध की श्रेणी में नहीं आता। शेष निराधार आरोप लगाए गए हैं। सरकारी वकील ने कहा शादी का झूठा वायदा कर सेक्स किया गया जो गंभीर अपराध है।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की नजीरो पर विचार करते हुए कहा कि दुष्कर्म का आरोप संदेह से परे साबित होना जरूरी है। शुरू से ही मंशा गलत होनी चाहिए। पीड़िता ने स्वयं चार महीने से सेक्स संबंध स्वीकार किया है।यह सबूत नहीं है कि शुरु में ही शादी का वायदा कर सेक्स संबंध बनाये।यदि सहमति से सेक्स संबंध बने हैं और बाद में अनबन के कारण दुष्कर्म का आरोप लगाने से अपराध नहीं होगा।
