अहिल्याबाई होल्कर की गौरवगाथा ने जगाई इतिहास और संस्कारों की चेतना
प्रयागराज (राजेश सिंह)। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर श्कर्मयोगिनी माता अहिल्याश् महानाट्य का मंचन किया गया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्त संगठन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा यह प्रस्तुति शुक्रवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में हुई।
महानाट्य में माता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया। इसमें उनके बाल्यकाल से लेकर शासनकाल तक की यात्रा, त्याग, सेवा, सुशासन, लोककल्याण और नारी सशक्तिकरण के आदर्शों को मंच पर प्रस्तुत किया गया। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्निर्माण में उनके योगदान को भी विशेष रूप से उजागर किया गया।
इस प्रस्तुति में शास्त्रीय रंगमंच परंपराओं, लोकनृत्य, प्रभावी संवाद, सजीव संगीत और आकर्षक मंच-सज्जा का समन्वय देखने को मिला। महानाट्य ने दर्शकों को इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ कर्मयोग, सेवा और नैतिक नेतृत्व जैसे मूल्यों की वर्तमान प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज जोन ज्योति नारायण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। पुलिस महानिरीक्षक प्रयागराज जोन अजय कुमार मिश्र विशिष्ट अतिथि थे। दोनों अधिकारियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला प्रयास बताया।
सीसीआरटी, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर भी कार्यक्रम में मौजूद थे। उनके मार्गदर्शन में इस महानाट्य की संकल्पना और निर्देशन किया गया था।
इस अवसर पर सीसीआरटी के उप-महानिदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक आशुतोष, उप-महानिदेशक भगवान वर्मा, महानाट्य की लेखिका डॉ. जुलेशा सिद्धार्थ और क्षेत्राधिकारी देवाराम मेघवाल भी उपस्थित थे। कला, संस्कृति और शिक्षा जगत से जुड़े कई लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
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