13 वर्षों से अन्न त्यागा; बोलीं- अब मेरा जीवन यही है
प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज में संगम की रेती पर माघ मेला चल रहा है। मेले में साधु-संतों का जमावड़ा लगा हुआ है। मेले में एक महिला महामंडलेश्वर कृष्ण माता आईं हैं। उनका दावा है नौकरी छोड़कर वह साध्वी बनीं हैं। कृष्ण माता का कहना है कि वह चेन्नई में कस्टम विभाग में ग्रेड-वन अधिकारी थीं। करीब 13 साल पहले उन्होंने अफसर की चमक-दमक छोड़कर ईश्वर की शरण ली। आज महिला अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में साधना में लीन हैं। साध्वी कृष्ण माता का असली नाम राध्येय कृष्णा है। वह तमिलनाडु के श्रीरंगम की रहने वाली हैं। माघ मेले में अरैल घाट पर उनका शिविर है। कृष्ण माता ने बताया कि कैसे उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया और संन्यासी जीवन को अपनाया। साध्वी कृष्णा माता का दावा है कि वह चेन्नई में कस्टम विभाग में ग्रेड-वन अधिकारी थीं।
मथुरा में साध्वी बनने का निर्णय लिया
तमिलनाडु के श्रीरंगम की रहने वाली कृष्ण माता वृंदावन के तपोवन में रहकर अपने जीवन को जी रही हैं। अभी माघ मेले में आई हैं। साध्वी कृष्णा माता ने कहा- मैं 2011 में नौकरी के दौरान मथुरा आई थी। यहां मधुसूदन स्वामी के आश्रम में रुकीं। वहां यहां साधु-संतों से काफी प्रभावित हुईं। कृष्ण माता ने बताया कि इसके बाद मैंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया और संन्यासी जीवन को अपना लिया। अब मैंने अपना पूर्व जीवन का त्याग दिया है। सारे मोह माया बंधन से मुक्त हो चुकी हूं। कृष्णा माता ने कहा- 2016 में अपने गुरु मधुसूदन स्वामी की से दीक्षा ली।
मेरे लिए राधे कृष्ण ही सब कुछ है। मेरा जीवन यही है। मैंने नौकरी क्यों छोड़ी, मेरे पुराने जीवन में क्या था। उन बातों को मैं कभी नहीं सोचती हूं। अब मुझे याद भी नहीं कि मैं कभी ग्रेड वन की अफसर थी। मैंने एक महिला अखाड़े बनाने का संकल्प लिया, जो अब धीरे-धीरे पूरा हो रहा है। कृष्ण माता ने कहा- हमारी संस्था का नाम कैविल्य अखाड़ा है। कैविल्य महिला अखाड़ा अभी 13 अखाड़े में शामिल नहीं है। जैसे किन्नर अखाड़ा अलग है। वैसे ही कैविल्य अखाड़ा बना हुआ है। मैं इस अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर हूं। इस अखाड़े में कई महिला संत और साध्वी हैं।
कृष्ण माता ने कहा- अब महिला अखाड़े को मजबूत करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी के हाथ में है कि वह हमारे अखाड़े को शामिल करते हैं या नहीं। लेकिन दिगंबर अखाड़े से बात चल रही है। अगर हमें अपने अखाड़े में शामिल करते हैं तो हम अपने महिला अखाड़े के साथ शामिल होंगे।
महिला अखाड़े का भी हो अलग शाही स्नान
कृष्ण माता ने कहा- महाकुंभ में महिला अखाड़ा ने शाही स्नान साथ में किया। हम चाहते हैं कि महिला कैविल्य अखाड़ा भी अलग शाही स्नान करे। हम महिला अखाड़ा शाही स्नान की तैयारी कर रहे है। 15 जनवरी को हमारे गुरु आ रहे हैं। सभी एक साथ शाही स्नान करेंगे। इसके लिए सारी व्यवस्थाएं की जा रही है। प्रशासन को पत्र भी भेजा जा रहा है। हम शाही स्नान नैनी के अरैल घाट पर शाही सवारी के साथ करेंगे।
13 वर्षों से अन्न का किया त्याग
कृष्ण माता ने कहा- मैंने 13 वर्ष पहले संन्यासी जीवन में आने पर अन्न का त्याग कर दिया। मैं अब एक समय फल का सेवन करती हूं और एक समय जल का सेवन करती हूं। कृष्ण माता ने कहा- हमें किसी से कोई दान और दक्षिणा नहीं चाहिए। किसी से कोई लाभ और लोभ नहीं है। सब कुछ त्याग कर दूसरा जन्म लिया है। इस जन्म को सिर्फ ईश्वर को समर्पित कर दिया है।
मथुरा में सीएम ने किया था सम्मानित
ब्रज नगरी मथुरा में तीर्थ विकास ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृष्णा माता को सम्मानित किया था। यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष मथुरा में आयोजित होता है। जिसमें कैवल्य महिला अखाड़े की ओर से कृष्ण माता का नाम शामिल किया गया था।
कृष्णा माता और हेमा मालिनी एक ही गांव की रहने वाली
कृष्ण माता का दावा है कि हेमा मालिनी और वह एक ही गांव की हैं। तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगापुरम की रहने वाली हैं। गांव में अक्सर मुलाकात होती थी। लेकिन अपने जीवन की आगे की शुरुआत करने के लिए हेमा मालिनी मुंबई चली गईं थी। इसके बाद से मुलाकात नहीं होती थी। मथुरा में सांसद बनने के बाद हेमा मालिनी से उनकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद से हर वर्ष हेमा मालिनी उनके आश्रम तपोवन मथुरा में मिलने आती हैं। कृष्ण माता भी हेमा मालिनी से मिलने के लिए उनके आवास पर जाती हैं।
विशेष: लखनऊ, कौशांबी, अयोध्या, गोरखपुर, झांसी सहित मध्य प्रदेश, बिहार व महाराष्ट्र से शीघ्र प्रकाशित होने वाले सूरज वार्ता हिंदी दैनिक समाचार पत्र के लिए ब्यूरो चीफ, रिपोर्टरों व विज्ञापन प्रतिनिधियों की। मोबाइल नंबर- 9451559870


