केदारनाथ से लाई गई भगवा गद्दी; उत्तराखंड के मंदिरों जैसी नक्काशी
देहरादून। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब शेरों वाली कुर्सी पर बैठेंगे। कुर्सी बेहद खास है। केदारनाथ प्रोजेक्ट में बची देवदार की लकड़ियों से कुर्सी बनाई गई है। इसमें उत्तराखंड के मंदिरों में बनी नक्काशी की झलक है। इससे सुगंधित खुशबू भी निकलती है। मतलब- जहां रखी जाएगी, वहां महकेगी। कुर्सी उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री (कर्नल रिटायर्ड) अजय कोठियाल ने भेंट की है। इसे 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन गोरखपुर जाकर योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया।
योगी को पसंद आई कुर्सी
योगी आदित्यनाथ सीएम होने के साथ गोरखपुर में स्थित गोरक्षनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर हैं। कुर्सी बतौर गोरक्षनाथ पीठाधीश्वर सौंपी गई है। सीएम को कुर्सी काफी पसंद आई। उन्होंने इसे गोरखनाथ मंदिर के मुख्य सभागार में स्थापित भी कर दिया है।
कुर्सी बनाने के पीछे की सोच क्या थी?
कर्नल अजय कोठियाल ने बताया- केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट के दौरान देवदार की लकड़ी का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ था। उसी में से कुछ लकड़ी बची हुई थी। उनका कहना है कि उन्हें यह विचार आया कि इस लकड़ी का उपयोग किसी पवित्र और धार्मिक स्थान से जुड़ी चीज बनाने में किया जाए। तब उन्होंने योगी आदित्यनाथ के लिए देवदार की विशेष कुर्सी बनवाने का निर्णय लिया।
सिंह की आकृति, शक्ति का प्रतीक
कुर्सी का डिजाइन आर्किटेक्ट कृष्ण कुडियाल ने तैयार किया। इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड के मंदिरों के वास्तुशिल्प का अध्ययन किया और उसी आधार पर फाइनल डिजाइन तैयार हुआ।
कुर्सी को चकराता के पास कोटा गांव के परम्परागत काष्ठ कारीगर ने करीब 15 दिन की मेहनत के बाद तैयार किया। कुर्सी के दोनों हत्थों पर सिंह आकृति उभारी गई है, जो शक्ति का प्रतीक है। वहीं पीछे की तरफ उत्तराखंड के मंदिरों में दिखाई देने वाली नक्काशी को उभारा गया है।
1998 में महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। मात्र 26 साल की उम्र में जीतकर संसद भवन पहुंचे थे। तब योगी आदित्यनाथ सबसे कम उम्र के सांसद थे।
भगवा रंग का इस्तेमाल, महासू मंदिर की काष्ठकला
कर्नल कोठियाल ने बताया- कुर्सी में मुख्य तौर पर महासू मंदिर की काष्ठ कला को समाहित करने का प्रयास किया गया है। कुर्सी की गद्दी का रंग भगवा है। योगी आदित्यनाथ का पसंदीदा रंग भी भगवा है।
उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ को यह कुर्सी बतौर महंत सौंपी गई है और उन्हें यह काफी पसंद आई। यही वजह रही कि इसे गोरखनाथ मंदिर के मुख्य सभागार में स्थापित कर दिया गया है।
कुर्सी से फैल रही देवदार की सौंधी सुगंध
इस खास कुर्सी की एक और खासियत यह है कि देवदार की लकड़ी की वजह से पूरे हॉल में इसकी सौंधी सुगंध भी फैल रही है।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम आनन्द सिंह बिष्ट और माता का नाम सावित्री देवी है। योगी कुल सात-भाई बहन हैं। योगी आदित्यनाथ अपने माता-पिता के पांचवी संतान हैं। मात्र 22 साल की उम्र में वह योगी बन गए।
कौन हैं कर्नल अजय कोठियाल?
कर्नल अजय कोठियाल केदारनाथ पुर्ननिर्माण प्रोजेक्ट का चेहरा रहे हैं। 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद धाम के पुनर्निर्माण में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद वे आम आदमी पार्टी से 2022 का विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर लड़े, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। वर्तमान में वे उत्तराखंड सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हैं।
विशेष: लखनऊ, कौशांबी, अयोध्या, गोरखपुर, झांसी सहित मध्य प्रदेश, बिहार व महाराष्ट्र से शीघ्र प्रकाशित होने वाले सूरज वार्ता हिंदी दैनिक समाचार पत्र के लिए ब्यूरो चीफ, रिपोर्टरों व विज्ञापन प्रतिनिधियों की। मोबाइल नंबर- 9451559870
