प्रयागराज में पहचानने के बावजूद बिना घरवालों को जानकारी दिए लाश मर्चरी भेजवाई
प्रयागराज (राजेश सिंह)। करछना के भुंडा गांव में हुए आशीष शर्मा हत्याकांड में स्थानी यह पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस मामले में डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने भुंडा पुलिस चौकी पर तैनात दरोगा कैलाश और सिपाही सुनील पटेल को निलंबित कर दिया है। साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आशीष के शव की शिनाख्त कराए बिना ही पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया था। जबकि मृतक थाने के आसपास का ही रहने वाला था। इसे लेकर परिजनों ने जमकर नाराजगी भी जताई थी और उनमें करछना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर बेहद आक्रोश भी था। उन्होंने जाम भी लगाया था। बाद में अफसर ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह स्थिति संभाली थी।
सूत्रों के अनुसार मामले में करछना थाना प्रभारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। दरअसल परिजनों को सूचना दिए बिना शव मर्चरी भिजवाने की जानकारी थाना प्रभारी को भी थी। ऐसे में अब यह पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने पहचान के लिए क्या प्रयास किए। भुंडा गांव निवासी आशीष शर्मा गुरुवार शाम गांव के ही हलीम अली के साथ भड़ेवरा बाजार गया था। देर रात तक घर न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
शुक्रवार सुबह धरवारा गांव के पास सड़क किनारे आशीष का शव मिला। घटनास्थल से कुछ दूरी पर हथौड़ी भी पड़ी हुई थी। आशीष के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान थे, जिससे हत्या की आशंका गहराई।
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने भुंडा चौराहे पर जाम लगा दिया। पुलिस ने उसी दिन हलीम अली समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा किया। पूछताछ में हलीम ने पुरानी रंजिश के चलते हथौड़ी से आशीष की हत्या करने की बात कबूल की। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को शव घर पहुंचा, लेकिन पत्नी के मुंबई में होने के कारण परिजनों ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। रविवार को पत्नी के पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों का आरोप है कि हत्या से करीब दस दिन पहले भुंडा चौकी पर तैनात दरोगा कैलाश और सिपाही सुनील पटेल ने बिना किसी तहरीर या विवाद के आशीष को घंटों चौकी पर बैठाकर रखा था। इन्हीं बिंदुओं पर कराई गई जांच में पुलिस की लापरवाही प्रथम दृष्टया साबित हुई। डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने बताया कि दरोगा और सिपाही को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
