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संगम क्षेत्र में पुआल जलाने से एनजीटी नियमों का उल्लंघन

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। आस्था का महापर्व माघ मेला 2026 संपन्न हो चुका है। इस दौरान 22 करोड़ 10 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। हालांकि, मेले के समापन के बाद मेला क्षेत्र में गंदगी और अव्यवस्था का अंबार लग गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरों की आशंका बढ़ गई है।

कल्पवासियों और विभिन्न संस्थाओं के मेला क्षेत्र से जाने के बाद जगह-जगह कचरे और पुआल के ढेर लगे हुए हैं। सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उचित सफाई नहीं हुई, तो गंगा तटीय इलाकों में मच्छर जनित और श्वास संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि सफाईकर्मी मैदान से पुआल हटाने के बजाय उसे वहीं जला रहे हैं। जगह-जगह सुलगते पुआल के ढेरों से निकलने वाला जहरीला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। यह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जिसने खुले में कूड़ा या पुआल जलाने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 के माघ मेले तक सफाई का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के पास था। अब यह जिम्मेदारी प्रयागराज मेला प्राधिकरण को सौंपी गई है। प्रशासन की इस लापरवाही पर जब अधिकारियों से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो कोई भी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुआ। अधिकारियों की यह चुप्पी मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। 

एक ओर जहां सरकार कुंभ और माघ मेले को 'स्वच्छ मेला' के रूप में प्रचारित करती है, वहीं समापन के बाद की ये तस्वीरें जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं। सफाई के अभाव और अवैध रूप से पुआल जलाने की घटनाएं सरकारी दावों के विपरीत हैं।

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