प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से फिजिकल रिलेशन को धोखाधड़ी मानने से इनकार कर दिया है। एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- आपसी सहमति से बने फिजिकल रिलेशन को बाद में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। यह केवल रिश्ता टूटने से होने वाली निराशा है।
कोर्ट ने कहा- बीएनएस की धारा-69 केवल धोखे या छल से बनाए गए संबंधों को दंडित करती है, न कि आपसी सहमति से बने रिश्तों के टूटने से उत्पन्न निराशा को। धारा-69 में शादी का झूठा वादा करके धोखे से संबंध बनाना है। इसमें जुर्म साबित होने पर 10 साल तक की अधिकतम सजा का प्रावधान है।
हाईकोर्ट के जज सिद्धार्थ वर्मा और अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए FIR रद्द करने का आदेश दिया है।
मामला नोएडा का है। 12 दिसंबर 2024 को एक युवती ने सेक्टर-63 थाने में एक युवक पर धमकाने, हमला और शादी का झूठा वादा करके रिलेशन बनाने (धारा-69) के आरोप में FIR दर्ज कराई। आरोपी युवक ने FIR रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
युवक के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि युवती और आरोपी युवक ने जोधपुर में एलएलएम की एक साथ पढ़ाई की थी। इस दौरान दोनों में दोस्ती हुई। दोनों ने शादी करने की सहमति बनी। जून 2023 में दोनों की सगाई हुई थी।
सगाई के बाद शादी की डेट 12 नवंबर 2024 तय हुई। शादी की डेट तय होने के बाद दोनों परिवारों ने शादी की तैयारियां शुरू कर दीं। कोर्ट में याची की तरफ से होटल की बुकिंग, शादी के कार्ड की प्रिंटिंग और फोटोग्राफर बुकिंग के सबूत पेश किए।
कोर्ट ने कहा- धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि याची की तरफ से शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थी। बाद में किन्हीं कारणों से रिश्ता टूट गया। दोनों के बीच मनमुटाव आ गया। कोर्ट ने पाया कि शादी का जो वादा किया था, वह सच्चा था। उसे पिछली तारीख से धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता है।
धारा-69 में अपराध तभी बनता है, जब पुरुष का शुरू से ही शादी करने का कोई इरादा न हो और उसने केवल रिलेशन के लिए झूठा वादा किया था। कोर्ट ने धारा-69 के तहत दर्ज FIR रद्द कर दी। हालांकि धमकाने, हमला करने और अन्य आरोप में दर्ज एफआईआर पर जांच के आदेश दिए हैं।

