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भारत का ग्लेडिएटर वैभव सूर्यवंशी

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अंडर-19 विश्व कप में शानदार शतक लगाने के बाद सीनियर टीम के लिए दावेदारी ठोकी

मुंबई। बिहार के छोटे से शहर समस्तीपुर में जन्मा क्यूट सा लड़का जब हाथ में बल्ला लेकर क्रिकेट स्टेडियम के अंदर जाता है तो ऐसा लगता है कि रोमन साम्राज्य का खूंखार ग्लेडिएटर रोम के एरीना में उतर रहा हो।

वह रोमन साम्राज्य के उस ग्लेडिएटर की तरह नजर आता है जो दर्शकों के मनोरंजन के लिए अपने हथियारों का कौशल दिखाने से कभी नहीं चूकता। जी हां, हम बात कर रहे हैं अंडर-19 विश्व कप के हीरो वैभव सूर्यवंशी की जिनके 80 गेंदों में बनाए गए 175 रनों की बदौलत भारत ने छठी बार यह विश्व कप अपने नाम किया।

कुछ सालों तक बिहार का नाम भारतीय क्रिकेट के मानचित्र से भी हट गया था लेकिन जैसे ही बीसीसीआई ने बिहार क्रिकेट संघ को मान्यता दी वैसे ही वैभव का भी उदय हुआ और बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने उस नाम को विश्व पटल पर चमका दिया। वैभव की उम्र को लेकर कई बार सवाल उठाए गए लेकिन वह डिगे नहीं, झुके नहीं। बिहार के लिए आयु वर्ग के मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने आगे बढ़ना जारी रखा।

पिछले सत्र में जब राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपने साथ जोड़ा तो वह 14 साल की उम्र में किसी आईपीएल टीम से खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। संजू सैमसन के चोटिल होने के बाद जब उन्हें खेलने का मौका मिला तो उन्होंने पहले ही मैच में ऐसी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की कि सब उनके मुरीद हो गए। इसके बाद उन्होंने उसी सत्र में 38 गेंद में शतक भी लगाया। वह टूर्नामेंट के इतिहास के सबसे तेज शतकों में से एक था।

इस अनुभव ने उनके शॉट सिलेक्शन को बेहतर ही नहीं किया बल्कि गेंदबाजों को समझने की क्षमता में सुधार भी किया। वह दबाव वाली स्थितियों के लिए मजबूत बन गए जिसका असर जिंबाब्वे में देखने को मिला। शांत दिखने वाला सूर्यवंशी अब बेरहम और अनुभवी हो गया है जो अपने इशारे पर खेल की गति को कंट्रोल करता है। उसका नजारा अंडर-19 वनडे विश्व कप के फाइनल में उन्होंने पूरी दुनिया को दिखाया।

हरारे में इंग्लैंड के विरुद्ध सिर्फ 55 गेंदों में तीन अंकों का स्कोर बनाकर बनाकर उन्होंने इस टूर्नामेंट के फाइनल में अब तक के सबसे बड़े स्कोर में से एक की नींव रखी। उन्होंने हरारे में जो किया वह वह सांसें रोक देने वाला था। सूर्यवंशी ने सिर्फ 80 गेंदों में 15 बार गेंदों को बिना टिप्पा खिलाए बाउंड्री के बाहर भेजा। उनकी बदौलत भारत ने पहले खेलते हुए 411 रन बनाए। यह एक ऐसा स्कोर था जिसने प्रभावी रूप से इंग्लैंड को बल्लेबाजी करने से पहले ही मुकाबले से बाहर कर दिया।

सूर्यवंशी की यह पारी निडर, पावरफुल और स्मार्ट खेल का मिश्रण थी। वैभव ने यहां एक अच्छी शुरुआत को बड़े फायदे में बदल दिया। उन्होंने अंडर-19 विश्व कप का समापन 30 छक्कों के साथ किया। वह अंडर-19 विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने 2022 में बने 18 छक्कों के पिछले रिकार्ड को पीछे छोड़ दिया। गेंदबाजों पर लगातार हावी रहने की क्षमता उन्हें इस प्रतियोगिता का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज बनाती है। इस पारी ने उनके सीनियर क्रिकेट में भी जाने की राह खोल दी है।

कुछ अहम बातें

35 गेंद में वैभव ने राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए गुजरात टायटंस के विरुद्ध लगाया था शतक।

वह आईपीएल इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक था।

13 साल की उम्र में वह आईपीएल डील पाने वाले और 14 साल की उम्र में खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने थे।

राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 1.1 करोड़ रुपये में खरीदा था।

सूर्यवंशी की ऐतिहासिक पारी से भारत ने छठा खिताब जीता

क्रिकेट के नए सितारे वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 वनडे विश्व कप के इतिहास की सबसे शानदार पारियों में से एक खेलते हुए भारत को इंग्लैंड के विरुद्ध फाइनल में 100 रन की बड़ी जीत दिलाकर रिकार्ड छठा खिताब जिताया। भारत ने इससे पहले 2022 में खिताब जीता था। सूर्यवंशी ने 80 गेंदों पर 175 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 411 रन बनाए।

412 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम 40.2 ओवर में 311 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड की ओर से केलेब फाल्कनर ने 67 गेंदों पर 115 रन की शानदार पारी खेली। 14 वर्षीय सूर्यवंशी ने मात्र 55 गेंदों में शतक पूरा कर इस टूर्नामेंट का दूसरा सबसे तेज शतक लगाया। यह पारी अंडर-19 विश्व कप फाइनल में अब तक का सर्वाेच्च व्यक्तिगत स्कोर भी है।

400 रन पार करने के बाद भारत जीत का प्रबल दावेदार बन गया था और गेंदबाजों ने भी सामूहिक प्रदर्शन करते हुए जीत सुनिश्चित की। यह टीम, कप्तान आयुष म्हात्रे के नेतृत्व में अपनी आक्रामकता और दमदार खेल के कारण अलग पहचान बना चुकी है, जिसमें सूर्यवंशी सबसे बड़ी ताकत साबित हुए। सूर्यवंशी के आउट होने के बाद अभिज्ञान कुंडू (40), वेदांत त्रिवेदी (32), विहान मल्होत्रा (30) और कनिष्क चौहान (37) ने उपयोगी योगदान दिया। हालांकि इंग्लैंड ने थोड़ी वापसी की कोशिश की, लेकिन भारत ने उन्हें मैच पर हावी नहीं होने दिया।

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