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प्रयागराज: कमला नेहरू हॉस्पिटल में नई तकनीक से कैंसर इलाज

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज के कमला नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल में कैंसर के मरीजों का इलाज बड़ी संख्या में किया जाता है। इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. दक्ष चंद्रा ने बताया कि कैंसर थेरेपी में अब रीसेंट एडवांसेज ने मरीजों की जिंदगी आसान बना दी है। मिनिमली इन्वेसिव ट्रीटमेंट्स से लिवर, हेड एंड नेक, पैंक्रियाटिक कैंसर जैसे घातक रोगों का इलाज होल सर्जरी के जरिए हो रहा है। सिर्फ 4-5 एमएम का छोटा सा कट लगता है जो जल्दी भर जाता है। मरीज अगले ही दिन घर लौट जाते हैं।

उन्होंने कहा ये तकनीकें पेशेंट्स के लिए वरदान हैं। प्रयागराज जैसे शहर में ये सुविधाएं उपलब्ध हैं जो मरीजों को बड़ा फायदा देती हैं। हॉस्पिटल स्टे कम होने से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल घटता है और मरीज जल्दी अपनों के पास पहुंच जाते हैं।

यूपी में सबसे ज्यादा गॉल ब्लैडर कैंसर

उत्तर प्रदेश में कैंसर के मरीजों में गॉल ब्लैडर कैंसर सबसे ऊपर है। इसके बाद ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, लिवर कैंसर, बोन और सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर के केस आते हैं। डॉ. चंद्रा के मुताबिक इनका इलाज अब हाई-टेक तरीके से हो रहा है।


लिवर कैंसर पर तकनीकें

लिवर कैंसर के लिए माइक्रोवेव एब्लेशन, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, क्रायोथेरेपी और इररिवर्सिबल इलेक्ट्रोपोरेशन जैसी मिनिमली इन्वेसिव होल सर्जरी की जा रही है। सीटी स्कैन या सोनोग्राफी गाइडेंस में ये प्रक्रियाएं होती हैं। मरीज अगले दिन डिस्चार्ज हो जाता है। इसके अलावा एंडोवस्कुलर तकनीक से खून की नसों के रास्ते ट्यूमर में डायरेक्ट हाई-ग्रेड कीमोथेरेपी दी जा रही है। सिस्टेमिक साइड इफेक्ट्स कम, क्योंकि ड्रग सीधे ट्यूमर की आर्टरी में जाती है और उसे ब्लॉक कर दिया जाता है। ट्यूमर धीरे-धीरे मर जाता है। एक्सरे, सोनोग्राफी या सीटी स्कैन से गाइडेड ये ट्रीटमेंट रिस्पॉन्स बेहतर देते हैं।

ट्यूमर बोर्ड

टीमवर्क से तय होता है प्रोटोकॉलकैंसर विभाग में मरीज पहले सर्जरी या मेडिकल ऑन्कोलॉजी में जाते हैं। फिर ट्यूमर बोर्ड मीटिंग होती है, जहां सर्जन, रेडिएशन, कीमो और इंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट साथ बैठते हैं। इंटरनेशनल गाइडलाइंस के मुताबिक ट्रीटमेंट प्लान बनता है- पहले सर्जरी, कीमो या एंसिलरी प्रोसीजर।

स्क्रीनिंग प्रोग्राम से शुरुआत

हॉस्पिटल में गॉल ब्लैडर, ओरल और ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग प्रोग्राम शुरू हो चुका है। सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई से स्टेज पता चलता है और प्रोटोकॉल तय होता है। यूपी में ये कैंसर हाई नंबर में हैं इसलिए शुरुआती जांच पर जोर।

हॉस्पिटल में रोजाना 650-700 कैंसर मरीज आते हैं। ये ट्रस्ट हॉस्पिटल है, सीएमओआर और आयुष्मान भार त योजनाओं से बेस्ट ट्रीटमेंट कम खर्च में मिलता है। हम कॉस्ट-इफेक्टिव मेथड्स से मरीजों की मदद कर रहे हैं।

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