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संगम: पीएसी के जवानों ने कई श्रद्धालुओं की बचाई जान

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। घरेलू कलह से परेशान मीरजापुर की काजल माघ मेले में पहुंची और फिर पांटून पुल नंबर तीन से गंगा में छलांग लगा दी। यह देख तुरंत बाढ़ राहत पीएसी के जवान पानी में कूद गए और महिला को सकुशल बचा लिया। थोड़ी देर बाद रीवा मध्य प्रदेश के कृष्ण कुमार मिश्रा ने पांटून पुल नंबर दो से गंगा नदी में कूद गया। वहां मुस्तैद जवानों ने डूब रहे युवक को रेस्क्यू करके बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाकर जान बचाई। 

संगम स्नान के दौरान इंदौर निवासी सुनीता के गले से एक लाख का मंगलसूत्र गिर गया, जिसे जवानों खोजकर निकाला और महिला को सौंपा। गोरखपुर के श्रद्धालु सुदामा का सामान चुराने वालों को जवानों ने दबोच लिया। मध्य प्रदेश निवासी राम नारायण की तबियत खराब होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाकर इलाज करवाया, जिससे उनकी जान बच गई।

माघ मेला में सिविल पुलिस की तरह पीएसी के जवान भी हर मोर्चे पर कठिन ड्यूटी करते हुए श्रद्धालुओं की जान बचाने और उनकी सुरक्षा घेरा को मजबूत बनाने में जुटे रहे। पीएसी की कुल 16 कंपनियां तैनात की गई थीं। सात कंपनी कानून-व्यवस्था और क्राउड मैनेजमेंट के लिए, सात कंपनी बाढ़ राहत व जल क्षेत्र की सुरक्षा, दो कंपनी जीआरपी के साथ लगाई गई।

सभी कंपनियों का नोडल अधिकारी आइपीएस सर्वेश कुमार मिश्रा को बनाया गया, जिनके नेतृत्व में पीएसी की सभी कंपनियां और उनके जवान दिनरात सेवा व सुरक्षा में जुटे रहे। मेला में 44वीं वाहिनी पीएसी मेरठ, 15वीं वाहिनी पीएसी आगरा, 45वीं वाहिनी पीएसी अलीगढ़, 26वीं वाहिनी पीएसी गोरखपुर, 42वीं वाहिनी पीएसी नैनी, 32वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ और चतुर्थ वाहिनी पीएसी धूमनगंज के जवानों को अलग-अलग जिम्मेदारी देते हुए तैनाती की गई थी।

एक महीने तक चले मेला में देश के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु, स्नानार्थी, पर्यटक कल्पवासी आए, जिनकी सुरक्षा, सेवा और सहायता में पीएसी के जवान तत्पर रहे। इसके चलते कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

पीएसी के कमांडर सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं के सुरक्षित स्नान, सुगम आवागमन और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के लिए पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था। बाढ़ राहत दल भी सक्रिय रहा। पूरी सजगता के साथ लगातार पेट्रोलिंग, निगरानी, बचाव व राहत कार्य किया गया, जिससे श्रद्धालुओं के जीवन रक्षा को सुनिश्चित किया गया।

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