धनूपुर ब्लाक क्षेत्र में तैनात ग्राम विकास अधिकारी की कारस्तानी
प्रयागराज (राजेश सिंह)। तीन बेटे, बहू और नाती-पोते सहित 18 लोगों का भरा-पूरा परिवार। फिर भी भोलानाथ 'निर्वंशी' ही हैं...। उनकी बहू व पोते ने करीब छह वर्ष दफ्तरों के चक्कर लगाए। अफसरों के यहां दो हजार से अधिक प्रार्थना पत्र दिए। आइजीआरएस में अनेकों शिकायतें दर्ज कराईं। सिर्फ इसलिए कि खुद को भोलानाथ का वारिस साबित कर सकें, लेकिन नौकरशाहों ने उनकी एक न सुनी।
परिवार कच्चे घर में रहता है
गंगापार में धनुपूर ब्लाक के हरिपुर उर्फ मिश्रपुर निवासी भोलानाथ तिवारी पीएम आवास योजना के पात्र थे। आवास मिलने की बारी आती, इससे पहले वर्ष 2015 में उनका निधन हो गया। उनके तीन बेटों रामचंद्र, श्यामधर और घनश्याम सहित करीब 18 लोगों का परिवार है। घनश्याम का परिवार कच्ची कोठरी में गुजर-बसर करता था। उनकी पत्नी प्रमिला को लगा कि पीएम आवास उन्हें मिलेगा।
रिपोर्ट लगा दी कि भोलानाथ का कोई वारिश नहीं
घनश्याम के बेटे अभिषेक ने बताया कि वर्ष 2018 में ग्राम विकास अधिकारी रामलाल यादव ने रिपोर्ट लगा दी कि उनके बाबा भोलानाथ का कोई वारिश ही नहीं है। इससे आवास मिलने की उम्मीद टूट गई। वर्ष 2020 में उन्हें जानकारी हुई तो दौड़भाग शुरू की। ब्लाक से लेकर विकास भवन और कलक्ट्रेट तक की परिक्रमा की। अलग-अलग दफ्तरों व अधिकारियों को दो हजार से अधिक शिकायती पत्र दिए। आइजीआरएस भी किए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
डीएम से शिकायत की, जांच में हुआ खुलासा
पिछले दिनों उन्होंने डीएम मनीष कुमार वर्मा से शिकायत की। डीएम के निर्देश पर डीडीओ जीपी कुशवाहा और डीपीआरओ रविशंकर द्विवेदी ने जांच की तो खुलासा हुआ। इसके बाद सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि देकर खानापूर्ति की जा रही है।
बाबू बोला...कहीं से मांगकर बनवा लेते घर
अभिषेक का कहना है कि डीएम के निर्देश पर हुई जांच की रिपोर्ट लेने वह विकास भवन गए थे। विकास विभाग में तैनात एक बाबू ने कहा कि इतना दौड़ क्यों लगाई? कहीं से मांगकर घर बनवा लेते।
पीड़ित पात्र होगा तो आवास मिलेगा : डीडीओ
डीडीओ जीपी कुशवाहा का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच की गई थी। इसमें गड़बड़ी सामने आई है। इस लापरवाही पर संबंधित सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। पीड़ित पात्र होगा तो आवास भी मिलेगा।
