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इलाहाबाद संग्रहालय में ‘एकल वस्तु प्रदर्शनी’ प्रारम्भ

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद संग्रहालय में ‘एकल वस्तु प्रदर्शनी’ श्रृंखला के अंतर्गत सोने की म्यान के पाक्षिक प्रदर्शन का आज शुभारम्भ किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन ज्योति नारायण, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रयागराज जोन द्वारा सौम्या अग्रवाल, मंडलायुक्त प्रयागराज एवं निदेशक, इलाहाबाद संग्रहालय की उपस्थिति में किया गया। उद्घाटन से पूर्व मंडलायुक्त द्वारा मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने प्रदर्शित स्कैबर्ड (सोने की म्यान) के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी लेते हुए इसे अरब और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया। उन्होंने संग्रहालय द्वारा आरम्भ की गई इस पाक्षिक प्रदर्शनी पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल से आमजन को दुर्लभ धरोहरों के अवलोकन का अवसर प्राप्त होगा। 

निदेशक सौम्या अग्रवाल ने बताया कि संग्रहालयों का मुख्य उद्देश्य समाज को उसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ना होता है। संग्रहालय न केवल अतीत की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास, कला और संस्कृति से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद संग्रहालय में अनेक महत्वपूर्ण वस्तुएं सुरक्षित हैं, जिनमें से कई स्थानाभाव के कारण स्थायी प्रदर्शनी में शामिल नहीं हो पातीं। इसी को ध्यान में रखते हुए संग्रहालय समिति ने निर्णय लिया है कि ऐसी दुर्लभ एवं अब तक अप्रदर्शित वस्तुओं को ‘एकल वस्तु प्रदर्शनी’ के माध्यम से प्रत्येक पखवाड़े जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस श्रृंखला की शुरुआत आज सोने की म्यान के प्रदर्शन से की गई है।

उन्होंने आगे बताया कि सोने से निर्मित यह म्यान लगभग 400 ग्राम वजनी है, जिसे एक अरब देश के शाह द्वारा उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल को उपहार स्वरूप प्रदान किया गया था। राष्ट्रीय धरोहर के रूप में इसके संरक्षण और जनसामान्य को इसके अवलोकन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से बाद में राजभवन उत्तर प्रदेश द्वारा इसे इलाहाबाद संग्रहालय को सौंप दिया गया, जहां इसे सुरक्षित रूप से संरक्षित रखा गया है।

संग्रहालय प्रशासन द्वारा पर्यटकों और शहरवासियों को संग्रहालय से जोड़ने के लिए कई नए प्रयास भी किए जा रहे हैं। इनमें विषय आधारित प्रदर्शनी, शैक्षणिक भ्रमण, विद्यार्थियों के लिए विशेष मार्गदर्शित टूर, कला एवं इतिहास से संबंधित संवाद कार्यक्रम तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए संग्रहालय की धरोहरों को व्यापक रूप से प्रदर्शित करने जैसी पहल शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य संग्रहालय को एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां आमजन, शोधकर्ता और कला-प्रेमी नियमित रूप से आकर ज्ञान और प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

इस प्रदर्शनी का संयोजन डॉ. संजू मिश्रा, सहायक संग्रहाध्यक्ष द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रदर्शनी प्रभारी डॉ. अजय कुमार मिश्र, डॉ. राजेश कुमार मिश्र, श्वेता सिंह, डॉ. वामन वानखेड़े,सुनील कुमार पाण्डेय, सोनिका तिवारी, शशांक त्रिपाठी, शैलेश कुमार सोनू तथा डॉ. सुशील सहित संग्रहालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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